• Banaras Now, Varanasi
  • March 5, 2026

वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की अविनाशी नगरी काशी में बसंत पंचमी के पावन पर्व पर सदियों पुरानी लोकपरंपरा के अनुरूप बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव श्रद्धा और उल्लास के साथ संपन्न हुआ। टेढ़ीनीम स्थित काशी विश्वनाथ मंदिर के महंत आवास पर बाबा की पंचबदन चल प्रतिमा का विधिविधान से तिलक किया गया। यह आयोजन काशीवासियों द्वारा लोकाचार के रूप में किया जाता है, जिसमें संपूर्ण काशी बाबा के सगुन में सहभागी बनती है।

बसंत पंचमी से विवाहोत्सव की परंपराओं का शुभारंभ

काशी की परंपरा में बसंत पंचमी केवल ऋतु परिवर्तन का पर्व नहीं, बल्कि बाबा विश्वनाथ के विवाह से जुड़े मांगलिक अनुष्ठानों की औपचारिक शुरुआत मानी जाती है। महंत आवास पर होने वाला तिलकोत्सव काशी की सांस्कृतिक चेतना का प्रतीक है, जहां देवता और भक्त के बीच पारिवारिक भाव स्पष्ट रूप से दिखाई देता है।

पहली बार शीतलाधाम महंत परिवार ने चढ़ाया तिलक

इस वर्ष दशाश्वमेध स्थित सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर के श्रीमहंत शिवप्रसाद पाण्डेय ‘लिंगिया महाराज’ ने पहली बार काशीपुराधीश्वर बाबा विश्वनाथ का तिलकोत्सव चढ़ाया। शीतलाधाम महंत परिवार की ओर से यह पहला लोकाचार रहा, जिसे काशी की धार्मिक परंपरा में विशेष महत्व के रूप में देखा गया।

भव्य तिलक यात्रा में गूंजा हर-हर महादेव

बांसफाटक स्थित श्री यंत्र पीठ से श्रीमहंत लिंगिया महाराज के नेतृत्व में भव्य तिलक यात्रा निकाली गई। 21 वैदिक बटुकों के मंत्रोच्चार, शहनाई की मधुर धुन, डमरुओं के नाद और शंखध्वनि के बीच 51 थालों में सजे तिलक और 56 भोग की थालियां लेकर तिलकहरुओं ने ‘हर हर महादेव’ के जयघोष के साथ महंत आवास तक यात्रा पूरी की।

टेढ़ीनीम क्षेत्र भक्तिरस में सराबोर

डमरुओं की गूंज और जयघोष से पूरा टेढ़ीनीम क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। गलियों से गुजरती तिलक यात्रा को देखने के लिए श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। यह दृश्य काशीवासियों के लिए आस्था के साथ-साथ पीढ़ियों से चली आ रही लोकपरंपरा का जीवंत दर्शन था।

चार वेदों के विद्वानों द्वारा विशेष वैदिक पूजन

तिलकोत्सव से पूर्व महंत आवास पर परिवार की वरिष्ठ सदस्य श्रीमती मोहिनी देवी के सानिध्य में अंकशास्त्री महंत वाचस्पति तिवारी द्वारा विशेष वैदिक पूजन कराया गया। आचार्य सुशील त्रिपाठी के आचार्यत्व में चारों वेदों के विद्वानों ने पंचबदन प्रतिमा का मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया।

भोग आरती के बाद राजसी श्रृंगार

दोपहर भोग आरती के उपरांत संजीव रत्न मिश्र (भानू मिश्र) द्वारा बाबा विश्वनाथ का भव्य राजसी श्रृंगार किया गया। विशेष वस्त्रों, आभूषणों और पुष्पों से सुसज्जित पंचबदन प्रतिमा के दर्शन के लिए श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

लोकाचार में सहभागी बना पूरा काशी समाज

महंत आवास पर काशीवासियों का स्वागत किया गया और महंत वाचस्पति तिवारी तथा श्रीमहंत लिंगिया महाराज के बीच विधिवत लोकाचार संपन्न हुआ। 56 भोग अर्पित कर वैदिक मंत्रों के बीच आरती की गई।

काशी की आत्मा है यह परंपरा : लिंगिया महाराज

श्रीमहंत लिंगिया महाराज ने कहा कि बसंत पंचमी बाबा विश्वनाथ के सगुन और मांगलिक अनुष्ठानों की शुरुआत का प्रतीक है। टेढ़ीनीम महंत आवास पर होने वाला तिलकोत्सव काशी की विशिष्ट लोकपरंपरा है, जो सनातन आस्था और सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रखती है।

रंगभरी एकादशी तक जारी रहेंगे अनुष्ठान

बसंत पंचमी से आरंभ हुए यह मांगलिक अनुष्ठान रंगभरी एकादशी तक निरंतर चलते रहेंगे। इस अवधि में बाबा विश्वनाथ और माता गौरा से जुड़ी लोकपरंपराएं निभाई जाएंगी, जो काशी की सांस्कृतिक पहचान और लोकआस्था को सशक्त करती हैं।

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thefrontfaceindia@gmail.com

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