वाराणसी। उत्तर प्रदेश के वाराणसी में करीब चार साल पहले हुए एक सनसनीखेज हत्याकांड में अदालत ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया है। कपसेठी थाना क्षेत्र में अपनी ही सहेली की फावड़े से गला काटकर बेरहमी से हत्या करने के मामले में अपर जिला जज आलोक कुमार की अदालत ने मुख्य आरोपी राखी वर्मा को दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास (उम्रकैद) की सजा सुनाई है।
इसके साथ ही कोर्ट ने दोषी महिला पर एक लाख रुपये का आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। अदालत ने आदेश दिया कि इस जुर्माने की 70 प्रतिशत राशि पीड़ित महिला के अनाथ हुए बच्चों को मुआवजे (क्षतिपूर्ति) के रूप में दी जाएगी। इस पूरे मामले के ट्रायल के दौरान अदालत में अभियोजन पक्ष की ओर से 9 गवाहों के बयान दर्ज कराए गए।
ब्लाउज डिजाइन के बहाने घर बुलाया, फिर दी दर्दनाक मौत
यह पूरी वारदात 21 अप्रैल 2022 की सुबह घटित हुई थी। दोषी राखी वर्मा ने अपनी सहेली कंचन वर्मा को फोन करके ब्लाउज का डिजाइन देखने के बहाने मंटूका (कपसेठी) स्थित अपने घर बुलाया था। कंचन अपने पति संजय वर्मा की बाइक से राखी के घर पहुंची।
इसके करीब 45 मिनट बाद राखी ने खुद कंचन के ही मोबाइल से उसके पति संजय को फोन किया और बेहद ठंडे दिमाग से कहा कि पुलिस (डायल 112) को फोन करो और आकर अपनी पत्नी को ले जाओ।
छत पर खून से लथपथ मिली लाश
जब बदहवास पति संजय राखी के घर पहुंचा, तो उसे पता चला कि दोनों महिलाएं छत पर बने कमरे में हैं। छत पर जाने पर कमरा अंदर से बंद मिला। जब दरवाजा खुला तो अंदर का नजारा खौफनाक था। कंचन का खून से लथपथ शव जमीन पर पड़ा हुआ था, उसका गला पूरी तरह कटा हुआ था और पास में ही वारदात में इस्तेमाल किया गया लहूलुहान फावड़ा पड़ा था। पति की सूचना पर पहुंची पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने तुरंत सबूत जुटाए और फावड़े को अपने कब्जे में लिया।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में क्रूरता की पुष्टि
पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों की गवाही और रिपोर्ट से साफ हुआ कि कंचन की मौत अत्यधिक खून बहने (हेमरेजिक शॉक) के कारण हुई थी। मृतका के चेहरे, गले और छाती पर धारदार हथियार से कई वार किए गए थे। उसके गले पर चार गहरे घाव थे, जिनमें से दो हड्डियों तक जा पहुंचे थे। इसके अलावा छाती पर 18 सेंटीमीटर लंबा गहरा चीरा पाया गया। प्रयोगशाला की जांच में भी घटनास्थल और फावड़े पर इंसानी खून होने की पुष्टि हुई थी।
समलैंगिकता और एकतरफा झुकाव बना हत्या की वजह
पुलिस की तफ्तीश और अदालत में पेश दलीलों के अनुसार, दोनों महिलाओं के बीच बेहद घनिष्ठ और अंतरंग संबंध थे। आरोपी महिला के बयानों से यह साफ हुआ कि इस हत्या के पीछे समलैंगिक संबंध (लेस्बियन रिलेशनशिप) की बात सामने आई। आरोपी राखी चाहती थी कि कंचन हमेशा उसके साथ ही रहे, लेकिन जब कंचन ने इसके लिए मना किया या दूरी बनानी चाही, तो राखी ने इस खौफनाक वारदात को अंजाम दे डाला।
हालांकि, बचाव पक्ष (राखी के वकील) ने कोर्ट में दलील दी थी कि राखी ने साल 2021 में ग्राम प्रधानी का चुनाव लड़ा था, इसलिए राजनीतिक रंजिश के तहत उसे इस मामले में झूठा फंसाया जा रहा है। लेकिन अदालत ने तमाम वैज्ञानिक सबूतों और गवाहों के आधार पर इस दलील को खारिज कर दिया।
‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ श्रेणी का मामला नहीं: कोर्ट
सुनवाई के आखिरी दिन सरकारी वकील ने इस हत्याकांड को बेहद क्रूर, बर्बर और अमानवीय बताते हुए दोषी राखी वर्मा के लिए फांसी (मृत्युदंड) की मांग की थी। वहीं, बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि अभियुक्त एक महिला है और उसका भविष्य देखते हुए सजा में नरमी बरती जाए। दोनों पक्षों को सुनने के बाद माननीय न्यायालय ने माना कि यह मामला ‘दुर्लभ से दुर्लभतम’ (Rarest of Rare) की श्रेणी में नहीं आता, इसलिए फांसी की जगह उम्रकैद की सजा देना ही न्यायसंगत होगा।