वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) प्रशासन ने सख्त रुख अपनाते हुए अनुशासनहीनता के मामले में 5 छात्रों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की है। विश्वविद्यालय के इस आदेश के बाद परिसर में खलबली मच गई है। जहाँ एक ओर प्रशासन इसे परिसर की मर्यादा बनाए रखने के लिए जरूरी बता रहा है, वहीं दूसरी ओर छात्रों ने इसे ‘दमनकारी कदम’ करार दिया है।
कार्रवाई की गाज: निलंबन से सुविधाओं तक की कटौती
प्रशासन द्वारा जारी आधिकारिक नोटिस के अनुसार, तीन छात्रों— पल्लव सुमन, सत्यानारायण सिंह और श्यामल कुमार— को उनके वर्तमान शैक्षणिक पाठ्यक्रम से 15 दिनों के लिए निलंबित कर दिया गया है।
कार्रवाई केवल निलंबन तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके दायरे में कई अन्य प्रतिबंध भी शामिल हैं:
- शैक्षणिक अधिकारों पर रोक: निलंबन के दौरान छात्र किसी भी क्लास, सेमिनार या शैक्षणिक गतिविधि का हिस्सा नहीं बन पाएंगे।
- हॉस्टल और लाइब्रेरी पर बैन: इन 15 दिनों के लिए छात्रों से छात्रावास और पुस्तकालय की सुविधाएं छीन ली गई हैं।
- कड़ी चेतावनी: आदेश में स्पष्ट है कि यदि निलंबन के दौरान कोई छात्र अनधिकृत रूप से हॉस्टल में पाया गया, तो उसे भविष्य में कभी भी छात्रावास आवंटित नहीं किया जाएगा।
छात्रों का पक्ष: “अव्यवस्था पर सवाल उठाने की सजा मिली”
कार्रवाई की जद में आए छात्रों ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उन्होंने सर सुंदरलाल अस्पताल की कुप्रबंधन और अव्यवस्थाओं के खिलाफ आवाज उठाई थी। छात्रों के अनुसार, जांच कमेटी ने प्रारंभिक जांच में उन पर लगे आरोपों को निराधार पाया था, इसके बावजूद बदले की भावना से यह दंडात्मक नोटिस जारी किया गया है।
सुधार का अनूठा तरीका: काउंसलिंग और सामुदायिक सेवा
निलंबन अवधि समाप्त होने के बाद भी छात्रों के लिए मुश्किलें खत्म नहीं होंगी। प्रशासन ने उनके व्यवहार में सुधार के लिए कुछ अनिवार्य शर्तें रखी हैं:
- 10 घंटे की सामुदायिक सेवा: छात्रों को परिसर में समाज सेवा करनी होगी।
- काउंसलिंग सत्र: किसी पेशेवर परामर्शदाता के साथ 5 काउंसलिंग सत्रों में भाग लेना अनिवार्य होगा।
- अभिभावकों को सूचना: इस पूरी कार्रवाई की जानकारी छात्रों के माता-पिता और उनके पीएचडी पर्यवेक्षकों (Supervisors) को भेज दी गई है।
दो अन्य छात्रों को ‘अंतिम चेतावनी‘
निलंबन के अलावा, पुनीत कुमार मिश्रा और शिवम सोनकर को प्रशासन ने ब्लैक लिस्ट की चेतावनी दी है। उन्हें सख्त लहजे में कहा गया है कि वे भविष्य में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन या विरोध प्रदर्शन से दूर रहें। यदि वे दोबारा किसी गतिविधि में पाए जाते हैं, तो उन्हें विश्वविद्यालय से निष्कासित तक किया जा सकता है।
