चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाए जाएंगे। यह नौ दिवसीय पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होता है और इसकी शुरुआत घटस्थापना (कलश स्थापना) से होती है।
घटस्थापना का शुभ मुहूर्त
नवरात्र के पहले दिन यानी 19 मार्च को घटस्थापना के लिए दो शुभ मुहूर्त बताए गए हैं—
- सुबह 6:52 बजे से 7:43 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:05 बजे से 12:53 बजे तक
इसी शुभ समय में कलश स्थापना करने से पूजा का पूर्ण फल प्राप्त होता है।
पहले दिन मां शैलपुत्री की पूजा
नवरात्र के प्रथम दिन मां शैलपुत्री की पूजा का विशेष महत्व है। इन्हें हिमालय की पुत्री माना जाता है। इस दिन भक्त माता को सफेद फूल, दूध से बनी मिठाई और नारियल अर्पित करते हैं।
घटस्थापना की पूजा विधि
- सबसे पहले घर या मंदिर के साफ स्थान पर चौकी स्थापित करें।
- उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं।
- मिट्टी के पात्र में जौ बोएं।
- तांबे या मिट्टी के कलश में जल भरकर उसमें चावल, सुपारी आदि डालें।
- कलश के मुख पर आम के पत्ते रखें और ऊपर नारियल स्थापित करें।
- इसके बाद दीप-धूप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान करें और पूजा आरंभ करें।
नवरात्र का महत्व
नवरात्र के नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों—शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्मांडा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी और सिद्धिदात्री—की पूजा की जाती है।
धार्मिक मान्यता है कि विधि-विधान से की गई पूजा, व्रत और साधना से भक्तों को सुख, समृद्धि और शक्ति की प्राप्ति होती है।
