वाराणसी। धर्म की नगरी काशी में चैत्र नवरात्र को लेकर तैयारियां तेज हो गई हैं। इस वर्ष नवरात्र का शुभारंभ 19 मार्च से हो रहा है। काशी में चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है, जहां नौ दुर्गा के साथ-साथ नौ गौरी की पूजा का भी विधान है। नवरात्र के प्रथम दिन माता शैलपुत्री के दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
मंदिरों में अंतिम चरण की तैयारियां
मंदिरों में दर्शन-पूजन को लेकर तैयारियां अंतिम चरण में हैं। मंदिर परिसर में स्थापित विग्रहों की साफ-सफाई और रंग-रोगन का कार्य किया जा रहा है। साथ ही श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए नगर निगम द्वारा मंदिर के अंदर और बाहर बैरिकेडिंग कराई गई है।
मंगला आरती के बाद खुलेंगे पट
अलईपुरा स्थित मां शैलपुत्री मंदिर के पुजारी के अनुसार, लगभग सभी तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। उन्होंने बताया कि नवरात्र के पहले दिन सुबह मंगला आरती के बाद श्रद्धालु माता के दर्शन कर सकेंगे। माता को चढ़ाया गया कोई भी प्रसाद वह स्नेहपूर्वक स्वीकार करती हैं, हालांकि गुड़हल का फूल उन्हें विशेष रूप से प्रिय माना जाता है।
बाजारों में बढ़ी रौनक, खरीदारी जोरों पर
इधर, नवरात्र की दस्तक के साथ ही काशी के बाजारों में भी रौनक बढ़ गई है। घर-घर में घट स्थापना और व्रत-पूजन की तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में पूजन सामग्री, नारियल, गंगाजल, हवन सामग्री, चुनरी और श्रृंगार की वस्तुओं की दुकानों पर भीड़ उमड़ रही है।
₹150 करोड़ से अधिक कारोबार की उम्मीद
रामनगर में नारियल-चुनरी विक्रेता संस्कार गुप्ता ने बताया कि इस बार बाज़ार में काफी हलचल देखने को मिल रहा है। इसके साथ ही चैत्र नवरात्रि में ₹150 करोड़ से अधिक के कारोबार की उम्मीद जताई जा रही है।
प्रमुख बाजारों में दिनभर चहल-पहल
चौक, नारियल बाजार, विश्वेश्वरगंज, अलईपुरा, दुर्गाकुंड व अन्य प्रमुख बाजारों में दिनभर चहल-पहल बनी हुई है। सुबह दुकानें खुलते ही ग्राहक पहुंचने लगते हैं और देर शाम तक खरीदारी जारी रहती है। खरीदारी के चलते शहर में ट्रैफिक का दबाव भी बढ़ गया है।
नवरात्र का धार्मिक महत्व
चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व शक्ति साधना का सर्वोत्तम काल माना जाता है। इस बार 19 मार्च 2026 से चैत्र नवरात्रि की शुरुआत हो रही है, जो मां दुर्गा की आराधना को समर्पित है। मान्यता है कि इन नौ दिनों में देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा होती है। साथ ही भक्तों द्वारा श्रद्धा भाव के साथ नौ दिनों का उपवास किया जाता है। नवरात्रि का पहला दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इसी दिन पूजा स्थल पर विधि-विधान के साथ कलश स्थापना की जाती है, जो पूरे अनुष्ठान की शुरुआत का प्रतीक माना जाता है।
