वाराणसी। फाल्गुन पूर्णिमा मंगलवार को लगने वाले खंड चंद्रग्रहण को लेकर काशी के प्रमुख मंदिरों में विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार चंद्रग्रहण के समय देव विग्रहों को स्पर्श या पूजन का विधान नहीं है, इसलिए ग्रहण से पूर्व ही मंदिरों के गर्भगृह के कपाट बंद कर दिए जाएंगे। ग्रहण मोक्ष के बाद साफ-सफाई, स्नान और आरती के उपरांत ही श्रद्धालुओं को दर्शन-पूजन की अनुमति दी जाएगी।
संकटमोचन हनुमान मंदिर सुबह 9 बजे होगा बंद
सबसे पहले संकटमोचन हनुमान मंदिर के कपाट सुबह नौ बजे सूतक लगते ही बंद कर दिए जाएंगे। मंदिर प्रशासन के अनुसार ग्रहण मोक्ष के बाद शाम सात बजे मंदिर के पट श्रद्धालुओं के लिए पुनः खोल दिए जाएंगे।
विश्वनाथ व अन्नपूर्णा मंदिर 4:30 बजे बंद
श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर और मां अन्नपूर्णा मंदिर के कपाट परंपरानुसार ग्रहण से डेढ़ घंटे पहले बंद कर दिए जाएंगे। दोनों मंदिरों के पट शाम 4:30 बजे बंद होंगे। ग्रहण मोक्ष 6:48 बजे होने के बाद मंदिरों में साफ-सफाई और विशेष पूजन-अर्चन के उपरांत लगभग 7:15 बजे पुनः दर्शन शुरू कराए जाएंगे।
मार्कंडेय महादेव मंदिर दोपहर 2 बजे से बंद
कैथी स्थित मार्कंडेय महादेव मंदिर दोपहर दो बजे से बंद कर दिया जाएगा। सूतक समाप्त होने के बाद शाम सात बजे मंदिर का कपाट खोल दिया जाएगा।
ग्रहण के दौरान श्रद्धालु मंदिर परिसर में बैठकर मानसिक जप-तप, यज्ञ-हवन और ध्यान कर सकते हैं, लेकिन देव विग्रहों का स्पर्श या प्रत्यक्ष पूजन वर्जित रहेगा।
35 वर्षों में छठीं बार बदला गंगा आरती का समय
चंद्रग्रहण के चलते दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती के समय में बदलाव किया गया है। सामान्यतः शाम 6:15 बजे होने वाली मां गंगा की दैनिक आरती अब ग्रहण मोक्ष के उपरांत शाम 7:30 बजे से शुरू होगी।
उल्लेखनीय है कि पिछले 35 वर्षों में यह छठीं बार है जब चंद्रग्रहण के कारण गंगा आरती के समय में परिवर्तन किया गया है। इससे पहले वर्ष 2025 में सात सितंबर को ग्रहण के चलते आरती दोपहर 12 बजे कराई गई थी। इसके अतिरिक्त 28 अक्तूबर 2023, 16 जुलाई 2019, 27 जुलाई 2018 और सात अगस्त 2017 को भी ग्रहण के कारण आरती के समय में बदलाव किया गया था।
