• Banaras Now, Varanasi
  • March 19, 2026

वाराणसी: बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री शुक्रवार को काशी पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया। इस दौरान उन्होंने कहा कि दुनिया में शांति का मार्ग यदि कहीं से निकल सकता है तो वह भारत की सनातन संस्कृति से ही संभव है। उन्होंने कहा कि आज दुनिया के कई हिस्सों में युद्ध जैसी स्थिति बनी हुई है, लेकिन भारत में शांति कायम है और इसकी बड़ी वजह भारतीय सेना की रणनीति, नीति और देशवासियों की वैचारिक एकता है।

शास्त्री काशी के अस्सी क्षेत्र स्थित मछली बंदर मठ पहुंचे, जहां उन्होंने मठ के पीठाधीश्वर से आशीर्वाद लिया। उनके आगमन की खबर मिलते ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु मठ परिसर में जुट गए। संत-महंतों और स्थानीय लोगों ने पुष्पवर्षा कर उनका स्वागत किया। इस दौरान श्रद्धालुओं ने ‘हर-हर महादेव’, ‘जय श्रीराम’ और ‘जय हनुमान’ के जयघोष लगाए। बागेश्वर बाबा ने भी हाथ जोड़कर सभी का अभिवादन स्वीकार किया और लोगों से संवाद किया। इस दौरान उनके अनुयायियों ने उनके साथ सेल्फी लेकर आशीर्वाद प्राप्त किया।

अस्सी घाट पर भी उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

मछली बंदर मठ से निकलने के बाद धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अस्सी घाट पहुंचे। यहां गंगा तट पर उन्होंने कुछ समय बिताया और अपने अनुयायियों से बातचीत की। घाट पर भी उनके दर्शन के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच गए और जयकारों के बीच उनका स्वागत किया गया।

इसके बाद वे अपने अनुयायियों के साथ काशी विश्वनाथ धाम के दर्शन के लिए रवाना हुए। उनके काफिले के गुजरने के दौरान रास्ते भर लोगों ने उनका स्वागत किया और धार्मिक जयघोष से पूरा माहौल गूंज उठा।

विश्व में शांति के लिए भारत की भूमिका जरूरी

इस दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने कहा कि वर्तमान समय में विश्व के कई हिस्सों में संघर्ष और अशांति का माहौल है। यदि दुनिया में स्थायी शांति स्थापित करनी है तो भारत और उसकी सनातन संस्कृति ही सही दिशा दिखा सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सनातन की विचारधारा में वह शक्ति है जो पूरे विश्व में संतुलन और शांति स्थापित कर सकती है।

साथ ही उन्होंने शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को समर्थन देने की बात भी कही।

मां के साथ किए बाबा विश्वनाथ के दर्शन

काशी प्रवास के दौरान धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अपनी मां के साथ श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में विधि-विधान से दर्शन-पूजन किया। उन्होंने कहा कि सनातन की संस्कृति मानवता को जोड़ने वाली संस्कृति है और यही विचारधारा विश्व में शांति स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

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