• Banaras Now, Varanasi
  • March 5, 2026

महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव की आराधना का सबसे पावन अवसर माना जाता है। इस दिन श्रद्धा और नियमों के साथ की गई पूजा से भोलेनाथ शीघ्र प्रसन्न होते हैं। लेकिन शास्त्रों के अनुसार पूजा के दौरान की गई छोटी-सी भूल भी साधना के फल को प्रभावित कर सकती है। ऐसे में महाशिवरात्रि पर शुभ मुहूर्त के साथ-साथ पूजा से जुड़ी सावधानियों को जानना बेहद जरूरी है।

Mahashivratri 2026 Date: कब मनाई जाएगी महाशिवरात्रि

साल 2026 में फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 15 फरवरी को शाम 05:04 बजे प्रारंभ होगी और 16 फरवरी को शाम 05:34 बजे समाप्त होगी। पंचांग के अनुसार, 15 फरवरी 2026 को ही महाशिवरात्रि का व्रत और पूजन किया जाएगा। इस दिन भगवान शिव की उपासना करते समय नियमों का पालन करना विशेष फलदायी माना गया है।

शिवलिंग पर भूलकर भी न चढ़ाएं ये वस्तुएं

शिव पूजा में कुछ चीजों का प्रयोग वर्जित बताया गया है। शिवलिंग पर कभी भी सिंदूर या कुमकुम अर्पित नहीं करना चाहिए, क्योंकि भगवान शिव वैराग्य के प्रतीक हैं। इसके अलावा, शंख का प्रयोग या शंख से जल अर्पित करना भी निषेध माना गया है। तुलसी के पत्ते भी शिवलिंग पर नहीं चढ़ाए जाते। गलत सामग्री से की गई पूजा से साधना में बाधा उत्पन्न हो सकती है।

अभिषेक के समय रखें इन बातों का ध्यान

शिवलिंग का अभिषेक करते समय तांबे के लोटे से जल चढ़ाना श्रेष्ठ माना जाता है, लेकिन तांबे के पात्र में दूध डालकर अभिषेक नहीं करना चाहिए। दूध के लिए चांदी या स्टील के बर्तन का उपयोग उचित होता है। अभिषेक के दौरान जल की धारा धीमी और निरंतर होनी चाहिए। साथ ही, शिवलिंग पर चढ़ाया गया प्रसाद स्वयं ग्रहण करने के बजाय श्रद्धालुओं में बांटना शुभ माना गया है।

व्रत के दौरान खान-पान और आचरण के नियम

महाशिवरात्रि व्रत में तामसिक भोजन का सेवन वर्जित होता है। इस दिन लहसुन, प्याज और भारी भोजन से दूरी बनाए रखें तथा सात्विक फलाहार करें। व्रत के दौरान क्रोध, कटु वचन और नकारात्मक विचारों से बचना चाहिए। शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव शुद्ध मन और सच्ची भक्ति से ही प्रसन्न होते हैं।

परिक्रमा और पूजन से जुड़े अन्य महत्वपूर्ण नियम

शिवलिंग की पूजा करते समय पूर्ण परिक्रमा नहीं की जाती। जहां से जल बाहर निकलता है, उस जलाधारी को कभी लांघना नहीं चाहिए और केवल आधी परिक्रमा ही करनी चाहिए। महादेव को टूटे या खंडित अक्षत अर्पित करना भी वर्जित है। पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का शुद्ध उच्चारण करें और पूजन के बीच में उठकर न जाएं।

श्रद्धा, संयम और नियमों के साथ की गई महाशिवरात्रि पूजा से भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है और जीवन में सुख-समृद्धि का मार्ग प्रशस्त होता है।

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thefrontfaceindia@gmail.com

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