• Banaras Now, Varanasi
  • March 5, 2026

वाराणसी। महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर वाराणसी एक बार फिर भक्ति, परंपरा और लोक संस्कृति के विराट दृश्य की साक्षी बनी। महामृत्युंजय मंदिर से मैदागिन, गोदौलिया होते हुए चितरंजन पार्क (डेढ़सी पुल) तक निकली भव्य शिव बारात ने पूरे शहर को शिवमय कर दिया। “हर-हर महादेव” के गगनभेदी जयघोष से वातावरण गुंजायमान हो उठा।

अलौकिक रूपों ने मोहा मन

शिव बारात में शामिल कलाकारों ने शिवगणों का अद्भुत स्वरूप धारण किया। गले में नरमुंडों की माला, शरीर पर भस्म, औघड़ वेशभूषा और दैत्य-राक्षसों के प्रतीकात्मक रूपों ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया। बंदर-भालू, सपेरे और मदारी की प्रस्तुतियों ने लोक उत्सव की छटा बिखेर दी। सड़कों के दोनों ओर और छतों पर खड़े हजारों लोगों ने इस अद्भुत दृश्य का आनंद लिया।

44 वर्षों से चली आ रही परंपरा

करीब 44 वर्षों से निरंतर आयोजित हो रही यह शिव बारात अब काशी का प्रमुख सांस्कृतिक उत्सव बन चुकी है। मान्यता है कि काशी विश्वनाथ मंदिर के अर्घ्य से सोने की चोरी और उसकी पुनर्प्राप्ति के बाद इस आयोजन की शुरुआत हुई थी। समय के साथ इसकी भव्यता और लोकप्रियता लगातार बढ़ती गई।

गंगा-जमुनी तहजीब की मिसाल

इस वर्ष शिव के दूल्हा स्वरूप में प्रख्यात नेत्र विशेषज्ञ डॉ. अनुराग टंडन नजर आए, जबकि शाहबाला की भूमिका में डॉ. रमेश दत्त पांडेय शामिल हुए। आयोजन में शहर के विभिन्न समुदायों की सहभागिता ने काशी की गंगा-जमुनी तहजीब को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।

विशेष आकर्षण बनीं झांकियां

प्रसिद्ध अभिनेता संजय मिश्रा की मौजूदगी ने आयोजन की रौनक बढ़ा दी। इसके साथ ही बरसाने की लठमार होली की झांकी ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। रंग, संगीत और पारंपरिक प्रस्तुतियों ने शिव बारात को भक्ति और उत्सव का अनुपम संगम बना दिया।

महाशिवरात्रि पर निकली यह ऐतिहासिक शिव बारात न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि वाराणसी की सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक एकता का सशक्त उदाहरण भी है।

Author

thefrontfaceindia@gmail.com

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *