• Banaras Now, Varanasi
  • March 5, 2026

काशी के प्रसिद्ध महाश्मशान मणिकर्णिका घाट की पहचान अब केवल परंपरा तक सीमित नहीं रहेगी। सदियों पुराने इस घाट का स्वरूप जल्द ही पूरी तरह बदलने वाला है। तेजी से चल रहे पुनर्निर्माण कार्य के बीच नए मणिकर्णिका घाट का मॉडल सामने आ चुका है, जिसने श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों की उत्सुकता और बढ़ा दी है।

करीब 17.56 करोड़ रुपये की लागत से मणिकर्णिका घाट का कायाकल्प किया जा रहा है। फिलहाल पुरानी सीढ़ियों को समतल करने और स्ट्रेचर के लिए सुगम रास्ता बनाने का कार्य जारी है। नए घाट पर व्यूइंग गैलरी, रैंप, बैठने की पर्याप्त व्यवस्था और बेहतर प्रकाश व्यवस्था की जाएगी, जिससे शवयात्रियों और परिजनों को सुविधा मिल सके।

परियोजना के तहत वेटिंग रूम, शौचालय, पीने के पानी की व्यवस्था, वेडिंग ज़ोन और लकड़ी के भंडारण के लिए विशेष स्थान बनाए जाएंगे। घाट के आसपास गंदगी और सीवेज की समस्या से निजात दिलाने के लिए ड्रेनेज सिस्टम को भी आधुनिक रूप दिया जाएगा, ताकि गंदा पानी गलियों में न फैले।

पुनर्निर्माण योजना के अंतर्गत कुल 18 शवदाह संरचनाएं तैयार की जाएंगी। इनमें से 10 पुरानी संरचनाओं की मरम्मत की जाएगी, जबकि 8 नई शवदाह संरचनाओं का निर्माण होगा। सभी दाह स्थल एलिवेटेड होंगे और यहां कम लकड़ी के उपयोग से शास्त्रीय विधि-विधान के अनुसार अंतिम संस्कार किया जा सकेगा। इससे प्रदूषण में कमी आएगी और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा।

इस परियोजना में घाट पर स्थित प्राचीन मंदिरों और धार्मिक स्थलों का भी संरक्षण किया जाएगा। जिलाधिकारी सतेंद्र कुमार के अनुसार, विष्णुपादुका, दत्तात्रेय पादुका, मणिकर्णिका कुंड समेत अन्य मंदिरों की मरम्मत और संरक्षण किया जाएगा, ताकि काशी के सनातन स्वरूप की गरिमा बनी रहे।

गौरतलब है कि मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण का कार्य रूपा फाउंडेशन के सीएसआर फंड से किया जा रहा है। इस परियोजना की आधारशिला स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रखी थी। कार्य पूरा होने के बाद यहां प्रतिदिन 100 से 150 शवों का अंतिम संस्कार सुचारू रूप से किया जा सकेगा।

इसके साथ ही महाश्मशान से जुड़े डोमराजा परिवार के लोगों के लिए भी बेहतर और व्यवस्थित सुविधाएं विकसित की जाएंगी। सदियों से यही परिवार यहां मुखाग्नि देने की परंपरा निभाता आ रहा है।

हालांकि इस प्रोजेक्ट को लेकर हाल के दिनों में विवाद भी हुआ था, लेकिन योगी सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि विकास कार्य के दौरान किसी भी धार्मिक स्थल या ऐतिहासिक धरोहर को नहीं हटाया जाएगा, बल्कि सभी का संरक्षण किया जाएगा।

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