वाराणसी। चैत्र नवरात्रि 19 मार्च से शुरू होकर 27 मार्च तक मनाया जाएगा। यह नौ दिवसीय पर्व मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए समर्पित होता है और इसकी शुरुआत घटस्थापना (कलश स्थापना) से होती है। चैत्र नवरात्र के पावन अवसर पर शिव की नगरी काशी में शक्ति उपासना का विशेष महत्व है। यहां मां दुर्गा के नौ स्वरूपों के साथ-साथ नौ गौरी के दर्शन की भी प्राचीन परंपरा निभाई जाती है। नवरात्र के नौ दिनों में श्रद्धालु अलग-अलग स्थानों पर स्थित इन देवी मंदिरों में दर्शन-पूजन करते हैं।
काशी में नौ गौरी परंपरा क्या है?
काशी में देवी गौरी के नौ स्वरूप अलग-अलग स्थानों पर विराजमान हैं। मान्यता है कि नवरात्र के दौरान इन सभी स्वरूपों के दर्शन करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। देवी उपासकों के अनुसार, विधि-विधान से पूजा और कन्या पूजन करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
दिनवार नौ गौरी और नवदुर्गा दर्शन
पहला दिन — मुख निर्मालिका गौरी और मां शैलपुत्री
गायघाट स्थित हनुमान मंदिर में मुख निर्मालिका गौरी विराजमान हैं। वहीं अलईपुर में मां शैलपुत्री का मंदिर है, जिनकी पूजा से यश, धन और शक्ति की प्राप्ति होती है।
दूसरा दिन — ज्येष्ठा गौरी और ब्रह्मचारिणी
कर्णघंटा के सप्तसागर क्षेत्र में ज्येष्ठा गौरी का मंदिर स्थित है। ब्रह्माघाट में मां ब्रह्मचारिणी की पूजा की जाती है।
तीसरा दिन — सौभाग्य गौरी और चंद्रघंटा
ज्ञानवापी क्षेत्र के सत्यनारायण मंदिर में सौभाग्य गौरी के दर्शन होते हैं। चौक क्षेत्र में मां चंद्रघंटा का मंदिर है।
चौथा दिन — शृंगार गौरी और कूष्मांडा
ज्ञानवापी परिसर में शृंगार गौरी विराजमान हैं। दुर्गाकुंड में मां कूष्मांडा का भव्य मंदिर स्थित है।
पांचवां दिन — विशालाक्षी गौरी और स्कंदमाता
मीरघाट के धर्मकूप क्षेत्र में विशालाक्षी गौरी का मंदिर है। जैतपुरा में मां बागेश्वरी (स्कंदमाता) की पूजा होती है।
छठा दिन — ललिता गौरी और कात्यायनी
ललिता घाट पर ललिता गौरी के दर्शन होते हैं। संकठा गली स्थित आत्मविश्वेश्वर मंदिर में मां कात्यायनी की पूजा होती है।
सातवां दिन — भवानी गौरी और कालरात्रि
विश्वनाथ गली के श्रीराम मंदिर में भवानी गौरी विराजमान हैं। कालिका गली में मां कालरात्रि का मंदिर स्थित है।
आठवां दिन — मंगला गौरी और महागौरी
पंचगंगा घाट पर मंगला गौरी का मंदिर है। मां महागौरी की पूजा श्री काशी विश्वनाथ मंदिर के पास स्थित अन्नपूर्णा मंदिर में की जाती है।
नौवां दिन — महालक्ष्मी गौरी और सिद्धिदात्री
लक्सा क्षेत्र के लक्ष्मीकुंड में महालक्ष्मी गौरी विराजमान हैं। वहीं गोलघर क्षेत्र में कालभैरव मंदिर के पास मां सिद्धिदात्री का मंदिर है।
| दिन | गौरी स्वरूप | मंदिर स्थान | संबंधित देवी |
|---|---|---|---|
| 1 | मुख निर्मालिका गौरी | गायघाट (हनुमान मंदिर) | शैलपुत्री |
| 2 | ज्येष्ठा गौरी | कर्णघंटा (सप्तसागर) | ब्रह्मचारिणी |
| 3 | सौभाग्य गौरी | ज्ञानवापी (सत्यनारायण मंदिर) | चंद्रघंटा |
| 4 | शृंगार गौरी | ज्ञानवापी परिसर | कूष्मांडा |
| 5 | विशालाक्षी गौरी | मीरघाट (धर्मकूप) | स्कंदमाता |
| 6 | ललिता गौरी | ललिता घाट | कात्यायनी |
| 7 | भवानी गौरी | विश्वनाथ गली (श्रीराम मंदिर) | कालरात्रि |
| 8 | मंगला गौरी | पंचगंगा घाट | महागौरी |
| 9 | महालक्ष्मी गौरी | लक्सा (लक्ष्मीकुंड) | सिद्धिदात्री |
पूजा का विशेष महत्व
- नवरात्र के पहले दिन कन्या पूजन का विशेष महत्व बताया गया है।
- तीन वर्ष की कन्या की विधि-विधान से पूजा करने पर मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
- नौ दिनों तक नियमित पूजा और आराधना करने से माता का आशीर्वाद बना रहता है।
प्रशासनिक तैयारियां
- मंदिर परिसरों की सफाई और सजावट
- बैरिकेडिंग और सुरक्षा व्यवस्था
- श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विशेष इंतजाम
आस्था का केंद्र बनेगी काशी
चैत्र नवरात्र के दौरान काशी पूरी तरह भक्ति और आस्था में डूबी नजर आती है। देश-विदेश से श्रद्धालु यहां पहुंचकर नौ गौरी और नवदुर्गा के दर्शन करते हैं और आध्यात्मिक ऊर्जा का अनुभव करते हैं।
