वाराणसी। पूर्वांचल की आपराधिक दुनिया में वर्षों तक रहस्यमय बने रहे शातिर शूटर बनारसी यादव का आखिरकार अंत हो गया। मंगलवार देर रात स्पेशल टास्क फोर्स (STF) के साथ मुठभेड़ में वह मारा गया। बनारसी यादव पर वाराणसी, गाजीपुर सहित कई जिलों में हत्या समेत कुल 21 मुकदमे दर्ज थे और वह 10 हत्याओं में वांछित था।
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, बनारसी यादव ऐसा अपराधी था जिसे पुलिस लंबे समय तक सिर्फ नाम से जानती थी, लेकिन उसका चेहरा पहचान में नहीं आ पाया था। वह कभी मोबाइल फोन का इस्तेमाल नहीं करता था और लगातार अपना हुलिया बदलता रहता था। यही कारण रहा कि कई संगीन वारदातों के बाद भी वह पुलिस की पकड़ से बाहर बना रहा।
महेंद्र गौतम हत्याकांड से उजागर हुई पहचान
सारनाथ क्षेत्र में कॉलोनाइजर महेंद्र गौतम की हत्या के बाद पहली बार बनारसी यादव का नाम ठोस रूप से सामने आया। गहन जांच के दौरान पुलिस को उसकी तस्वीर मिली, जिसके बाद से STF और स्थानीय पुलिस की टीमें उसकी तलाश में जुट गईं।
जांच में सामने आया कि गाजीपुर निवासी प्रॉपर्टी डीलर योगेंद्र यादव ने 50 करोड़ रुपये की जमीन को लेकर हुए विवाद में महेंद्र गौतम की हत्या की साजिश रची थी। इस वारदात को अंजाम देने के लिए बनारसी यादव को पांच लाख रुपये की सुपारी दी गई थी। 21 अगस्त 2025 को कॉलोनाइजर की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इसके बाद पुलिस ने बनारसी यादव पर एक लाख रुपये का इनाम घोषित किया था।
STF से मुठभेड़
मंगलवार देर रात पुख्ता सूचना के आधार पर STF ने वाराणसी में बनारसी यादव को घेर लिया। पुलिस द्वारा आत्मसमर्पण की चेतावनी देने पर उसने फायरिंग शुरू कर दी। फायरिंग के दौरान दो सिपाहियों के पास से गोलियां निकलीं, लेकिन वे सुरक्षित बच गए।
जवाबी कार्रवाई में STF ने फायरिंग की, जिसमें बनारसी यादव को दो गोलियां लगीं। उसे घायल अवस्था में अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया।
हथियार बरामद
एनकाउंटर के बाद मौके से दो पिस्टल और कारतूस बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार, बनारसी यादव गाजीपुर के करंडा थाना क्षेत्र का रहने वाला था और पूर्वांचल में सुपारी लेकर हत्याएं करने वाले बड़े शूटरों में गिना जाता था।
