नई दिल्ली। भारत का गणतंत्र दिवस परेड केवल एक राष्ट्रीय उत्सव नहीं, बल्कि देश के लोकतांत्रिक इतिहास का सबसे गौरवशाली प्रतीक है। 26 जनवरी 1950 को जब भारत औपचारिक रूप से एक संप्रभु गणराज्य बना, उसी दिन देश की पहली गणतंत्र दिवस परेड आयोजित हुई। यह ऐतिहासिक परेड नई दिल्ली के इरविन स्टेडियम (अब राष्ट्रीय स्टेडियम) में हुई थी।
यह दिन भारतीय संविधान के लागू होने और गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1935 के समाप्त होने का प्रतीक बना, जिसने भारत को ब्रिटिश डोमिनियन से पूर्ण गणराज्य में परिवर्तित किया।
पहली गणतंत्र दिवस परेड में राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने ली सलामी
भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद ने देश की पहली गणतंत्र दिवस परेड की सलामी ली। उस समय समारोह आज जितना भव्य नहीं था, लेकिन इसका ऐतिहासिक और संवैधानिक महत्व अत्यंत गहरा था।
अपने संबोधन में उन्होंने पहले हिंदी और फिर अंग्रेजी में कहा कि भारत के इतिहास में यह पहला अवसर है, जब पूरा देश एक संविधान और एक संघ के अंतर्गत एकजुट हुआ है, जिसे 32 करोड़ से अधिक नागरिकों के कल्याण की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
कब इरविन स्टेडियम से राजपथ पर पहुंची गणतंत्र दिवस परेड
स्वतंत्रता के बाद शुरुआती कुछ वर्षों तक गणतंत्र दिवस परेड इरविन स्टेडियम में ही आयोजित होती रही। लेकिन जैसे-जैसे आयोजन का आकार और राष्ट्रीय महत्व बढ़ता गया, एक बड़े और अधिक प्रतीकात्मक स्थल की आवश्यकता महसूस हुई।
वर्ष 1955 में परेड को किंग्सवे (अब राजपथ, वर्तमान में कर्तव्य पथ) पर स्थानांतरित कर दिया गया। यह मार्ग राष्ट्रपति भवन से इंडिया गेट तक फैला हुआ है और देश का सबसे प्रमुख औपचारिक मार्ग माना जाता है।
राजपथ से कर्तव्य पथ तक: गणतंत्र दिवस की पहचान बना ऐतिहासिक मार्ग
राजपथ — जिसे हाल ही में कर्तव्य पथ नाम दिया गया — जल्द ही गणतंत्र दिवस समारोह की स्थायी पहचान बन गया। यहां से परेड को नई भव्यता मिली, जिसमें—
- थल, जल और वायुसेना का प्रदर्शन
- राज्यों की सांस्कृतिक झांकियां
- भारतीय वायुसेना की फ्लाई-पास्ट
- विदेशी मुख्य अतिथियों की भागीदारी
जैसे आयोजन शामिल होने लगे।
गणतंत्र दिवस परेड: भारत की एकता, विविधता और संविधान की जीवंत झलक
आज गणतंत्र दिवस परेड भारत के सबसे बड़े और सबसे अधिक देखे जाने वाले राष्ट्रीय आयोजनों में शामिल है। यह परेड न केवल देश की सैन्य शक्ति, बल्कि सांस्कृतिक विविधता और संवैधानिक मूल्यों की जीवंत झलक प्रस्तुत करती है।
गणतंत्र दिवस परेड की यह ऐतिहासिक यात्रा भारत के लोकतंत्र, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव की अमर कहानी बन चुकी है।
