वाराणसी। शहर में गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी और कथित तौर पर मांसाहारी भोजन करने का वीडियो वायरल होने के बाद मामला तूल पकड़ता जा रहा है। पुलिस ने इस मामले में 14 मुस्लिम युवकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
यह कार्रवाई बीजेपी युवा मोर्चा के कार्यकर्ताओं की शिकायत के बाद हुई, जिसके बाद अब इस मुद्दे पर राजनीतिक और धार्मिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं।
शंकराचार्य की कड़ी प्रतिक्रिया
मामले पर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि गंगा को ‘मां’ मानने के बजाय कुछ लोग इसे कमाई का साधन बना रहे हैं। उन्होंने कहा कि इसी वजह से गंगा में इस तरह के “अपवित्र” कृत्य देखने को मिल रहे हैं।
क्रूज और व्यावसायिक गतिविधियों पर सवाल
शंकराचार्य ने गंगा में चल रहे लग्जरी क्रूज और उसमें होटल जैसी सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि गंगा में मांस और मदिरा का सेवन तथा होटल जैसी गतिविधियां आस्था के साथ खिलवाड़ हैं।
उन्होंने कहा कि पहले नाविक गंगा को मां मानते थे और श्रद्धालुओं को केवल एक किनारे से दूसरे किनारे तक पहुंचाते थे, लेकिन अब कमाई के लिए सब कुछ नजरअंदाज किया जा रहा है।
कानूनी कार्रवाई
पुलिस ने इस मामले में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं, धार्मिक भावनाएं आहत करने और सार्वजनिक उपद्रव से जुड़े प्रावधानों के तहत केस दर्ज किया है। साथ ही जल प्रदूषण से संबंधित कानूनों के तहत भी कार्रवाई की गई है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
इस घटना को लेकर बीजेपी, कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है। सभी दलों ने गंगा में इस तरह की गतिविधियों की निंदा की है और आस्था से जुड़े सवाल उठाए हैं।
स्थानीय लोगों में नाराजगी
घटना के बाद स्थानीय लोगों में भी नाराजगी देखी जा रही है। लोगों ने सख्त कार्रवाई की मांग करते हुए नाव संचालकों की भूमिका पर भी सवाल उठाए हैं।
आस्था बनाम कमाई की बहस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद अब गंगा की पवित्रता और उसके व्यावसायिक उपयोग को लेकर बहस तेज हो गई है। सवाल उठ रहा है कि क्या गंगा की धार्मिक आस्था को बनाए रखा जा सकेगा या फिर इसे कमाई का जरिया बनाकर ऐसे मामले सामने आते रहेंगे।
फिलहाल यह मामला वाराणसी ही नहीं, बल्कि पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बना हुआ है।
