वाराणसी। गंगा नदी पर मालवीय पुल के समीप प्रस्तावित सिग्नेचर ब्रिज के निर्माण कार्य की शुरुआत अगले महीने फरवरी से होने जा रही है। पुल की डिजाइन फाइनल होने के बाद रेल मंत्रालय द्वारा निर्माण कंपनी के चयन की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में है। फरवरी के पहले सप्ताह में कंपनी का चयन कर लिया जाएगा।
इस महत्वाकांक्षी परियोजना की आधारशिला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा रखी जाएगी। इसके साथ ही पीएम नगर निगम के नए सदन की आधारशिला भी रख सकते हैं।
करीब तीन साल में सिग्नेचर ब्रिज को पूरा करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। यह रेल-सह-सड़क पुल मालवीय पुल से लगभग 50 मीटर की दूरी पर, नमो घाट और पड़ाव के बीच समानांतर रूप से बनाया जाएगा। निर्माण कार्य की निगरानी उत्तर रेलवे लखनऊ मंडल की ओर से गठित टीम करेगी।
देश का सबसे बड़ा सिग्नेचर ब्रिज होगा
बीते 8 नवंबर को काशी दौरे पर आए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों के साथ प्रस्तावित स्थल का निरीक्षण किया था। उस दौरान उन्होंने इसे देश का सबसे बड़ा सिग्नेचर ब्रिज बताया था। अब इस परियोजना के धरातल पर उतरने की प्रक्रिया शुरू होने जा रही है।
2600 करोड़ की लागत, 1074 मीटर लंबा ब्रिज
करीब 2600 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाला यह सिग्नेचर ब्रिज 1074 मीटर लंबा होगा। इसके निचले हिस्से में चार लेन का रेलवे ट्रैक और ऊपरी हिस्से में छह लेन की सड़क बनाई जाएगी। आधुनिक तकनीक के जरिए गंगा नदी के बीच आठ पिलर स्थापित किए जाएंगे।
वाराणसी स्टेशन और डीडीयू जंक्शन को मिलेगा नया रेल ट्रैक
ब्रिज के साथ-साथ वाराणसी रेलवे स्टेशन और दीनदयाल उपाध्याय जंक्शन को जोड़ने के लिए नया रेल ट्रैक भी बनाया जाएगा, जिससे रेल यातायात और अधिक सुगम हो सकेगा।
उत्तर रेलवे के एडीआरएम बीके यादव के अनुसार, सिग्नेचर ब्रिज निर्माण से जुड़ी सभी आवश्यक औपचारिकताएं अंतिम चरण में हैं और कंपनी चयन के बाद तुरंत कार्य शुरू कर दिया जाएगा।

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