वाराणसी, 14 मार्च 2026: जनपद न्यायालय वाराणसी में शनिवार को राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीवानी सभागार में जिला जज संजीव शुक्ला ने दीप प्रज्वलित कर किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि लोक अदालत समाज में आपसी विवादों को सौहार्दपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रभावी माध्यम बनकर उभरी है और यह परिवारों को जोड़ने का कार्य कर रही है।
अपने संबोधन में जिला जज ने कहा कि लोक अदालत की अवधारणा भारत के लिए नई नहीं है। प्राचीन समय से ही पंचायत व्यवस्था के माध्यम से लोग आपसी बातचीत और समझौते से विवादों का समाधान करते रहे हैं। वर्ष 1987 के अधिनियम के तहत इस व्यवस्था को कानूनी मान्यता प्रदान की गई। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के माध्यम से बिना समय गंवाए गंभीर मामलों का भी त्वरित निस्तारण संभव हो पाता है।
पारिवारिक मामलों की बढ़ती संख्या पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि परिवार समाज की मूल इकाई है और न्यायालय की भूमिका पारिवारिक समरसता बनाए रखने में महत्वपूर्ण है। न्यायालय का उद्देश्य परिवारों को जोड़ना है, तोड़ना नहीं।
17 वैवाहिक जोड़ों को साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया
कार्यक्रम में प्रधान न्यायाधीश, परिवार न्यायालय अनिरुद्ध कुमार तिवारी भी मौजूद रहे। उन्होंने बताया कि पारिवारिक न्यायालय के माध्यम से 17 वैवाहिक जोड़ों को फिर से साथ रहने के लिए प्रेरित किया गया।
इस दौरान बनारस व सेंट्रल बार के महामंत्री और राष्ट्रीय लोक अदालत के नोडल अधिकारी आलोक कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव प्रवीण कुमार, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के जीएम बी.एन. सिंह सहित कई न्यायिक अधिकारी उपस्थित रहे।
लाखों मामलों का निस्तारण
राष्ट्रीय लोक अदालत के दौरान जनपद न्यायालय वाराणसी में कुल 44,712 मामलों का निस्तारण किया गया, जिसमें 6,64,37,588.47 रुपये की वसूली हुई।
वहीं प्रशासन एवं अन्य विभागों द्वारा 4,36,502 मामलों का निस्तारण कर 10,29,13,390 रुपये की वसूली के लिए समझौता कराया गया।
इस प्रकार न्यायालय और प्रशासन के विभिन्न विभागों को मिलाकर कुल 4,81,214 मामलों का निस्तारण किया गया, जिससे करीब 16.93 करोड़ रुपये की धनराशि की वसूली सुनिश्चित हुई।
