लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर अब सरकार का सख्त नियंत्रण होगा। यात्रियों की सुरक्षा और किराये में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए योगी सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए नई एग्रीगेटर पॉलिसी 2026 को मंजूरी दे दी है। इस नीति के तहत अब Ola, Uber और Rapido जैसी कंपनियों को प्रदेश में सेवाएं देने के लिए अनिवार्य रूप से राज्य सरकार से रजिस्ट्रेशन और लाइसेंस लेना होगा।
परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह ने बताया कि अब तक ऐप आधारित टैक्सी सेवाओं पर सरकार का सीधा नियंत्रण सीमित था। इसलिए केंद्र सरकार की मोटर व्हीकल एग्रीगेटर गाइडलाइन्स 2025 के आधार पर प्रदेश सरकार ने अपने नए नियम तैयार किए हैं, ताकि यात्रियों को सुरक्षित और पारदर्शी सेवा मिल सके।
ड्राइवरों का वेरिफिकेशन अनिवार्य
नई नीति के अनुसार सभी कैब और बाइक टैक्सी ड्राइवरों का पुलिस वेरिफिकेशन और मेडिकल टेस्ट अनिवार्य होगा। जांच पूरी होने के बाद ही ड्राइवर ऐप पर सक्रिय हो सकेंगे। इससे यात्रियों, खासकर महिलाओं की सुरक्षा को बेहतर बनाया जा सकेगा।
किराये पर लगेगी लगाम
सरकार अब इन कंपनियों के मनमाने किराये और सर्ज प्राइसिंग (Surge Pricing) पर नियंत्रण करेगी। पीक ऑवर्स के दौरान बढ़ाए जाने वाले किराये की अधिकतम सीमा तय की जाएगी, जिससे यात्रियों को राहत मिल सके।
सुरक्षा के लिए अनिवार्य फीचर्स
सभी कैब और बाइक टैक्सी वाहनों में पैनिक बटन और GPS ट्रैकिंग सिस्टम अनिवार्य होगा। इन सुविधाओं को सीधे कंट्रोल रूम से जोड़ा जाएगा, ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।
शिकायतों के लिए ऑनलाइन सिस्टम
कंपनियों को एक प्रभावी ऑनलाइन शिकायत निवारण प्रणाली (Grievance Redressal System) बनानी होगी, जिससे यात्रियों और ड्राइवरों की समस्याओं का त्वरित समाधान हो सके।
ड्राइवरों को भी मिलेगा फायदा
नई नीति में ड्राइवरों के हितों का भी ध्यान रखा गया है। कंपनियों को अपने ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस देना अनिवार्य किया जा सकता है। इसके अलावा राइड कैंसिलेशन पर लगने वाली पेनल्टी के नियम अब ड्राइवर और यात्री दोनों के लिए समान होंगे।
नोट: सरकार के अनुसार यह नियम अगले कुछ हफ्तों में पूरे प्रदेश में लागू कर दिए जाएंगे। यदि कोई कंपनी इन नियमों का उल्लंघन करती है तो उस पर भारी जुर्माना और लाइसेंस रद्द करने जैसी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
