• Banaras Now, Varanasi
  • April 18, 2026

लखनऊ: समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव के ‘सास-बहू’ वाले बयान पर भारतीय जनता पार्टी की वरिष्ठ नेता स्मृति ईरानी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए जवाब देते हुए कहा कि राजनीतिक मुद्दों पर गंभीरता से काम करने की जरूरत है, न कि व्यक्तिगत टिप्पणियां करने की।

दरअसल, संसद में चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने बिना नाम लिए तंज कसते हुए कहा था कि “सास-बहू वाली हार गई।” इस बयान को स्मृति ईरानी से जोड़कर देखा गया, जिसके बाद उन्होंने तुरंत प्रतिक्रिया दी।


स्मृति ईरानी का तीखा जवाब

स्मृति ईरानी ने अपने बयान में कहा कि उन्हें जानकारी मिली है कि अखिलेश यादव ने संसद में उनका जिक्र किया। उन्होंने कटाक्ष करते हुए कहा कि जो लोग राजनीति विरासत में पाते हैं, वे उन लोगों पर टिप्पणी कर रहे हैं जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई है।

उन्होंने यह भी कहा कि कामकाजी महिलाओं पर टिप्पणी करना उचित नहीं है, खासकर उन लोगों द्वारा जिन्होंने खुद कभी पेशेवर जीवन का अनुभव नहीं किया।

ईरानी ने सलाह देते हुए कहा कि संसद में गंभीर मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए और महिलाओं के सशक्तिकरण से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों को पारित कराने में योगदान देना चाहिए।


अखिलेश यादव ने भी साधा था निशाना

इससे पहले लोकसभा में महिला आरक्षण और परिसीमन से जुड़े मुद्दों पर चर्चा के दौरान अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए थे।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं के मुद्दों को सिर्फ नारों तक सीमित रखती है, जबकि जमीनी स्तर पर उन्हें पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं दिया जाता।

अखिलेश यादव ने यह भी कहा कि जिन राज्यों में भाजपा की सरकार है, वहां महिलाओं की भागीदारी शीर्ष पदों पर सीमित है। उन्होंने दावा किया कि पार्टी अपने संगठन और सरकार में महिलाओं को पर्याप्त अवसर देने में पीछे है।


महिला आरक्षण पर सियासत तेज

महिला आरक्षण बिल को लेकर राजनीतिक दलों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है। एक ओर भाजपा इसे महिलाओं के सशक्तिकरण की दिशा में बड़ा कदम बता रही है, वहीं विपक्ष इसके क्रियान्वयन और वास्तविक प्रभाव को लेकर सवाल उठा रहा है।

इस पूरे मुद्दे ने संसद से लेकर सोशल मीडिया तक राजनीतिक माहौल को गर्म कर दिया है।


राजनीतिक बयानबाजी ने बढ़ाई गर्मी

दोनों नेताओं के बीच इस बयानबाजी ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है। जहां एक ओर भाजपा इस मुद्दे को महिला सम्मान से जोड़ रही है, वहीं विपक्ष सरकार की नीतियों पर सवाल उठाकर अपनी रणनीति मजबूत करने में जुटा है।

आने वाले समय में महिला आरक्षण और इससे जुड़े मुद्दों पर राजनीति और तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

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