कानपुर, उत्तर प्रदेश: कानपुर में एक चौंकाने वाला किडनी रैकेट सामने आया है, जिसमें एक कर्मचारी खुद को डॉक्टर बताकर कई नर्सिंग होम में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट कराता था। पिछले दो सालों में 9 से अधिक अस्पतालों में 50 से ज्यादा अवैध ट्रांसप्लांट किए जाने का खुलासा हुआ है।
पुलिस और स्वास्थ्य विभाग ने आहूजा अस्पताल में इस गोरखधंधे का पर्दाफाश किया, जिसके बाद पूरे नेटवर्क की जांच शुरू कर दी गई है। इस रैकेट के तार दिल्ली-एनसीआर और उत्तर प्रदेश के कई शहरों से जुड़े पाए जा रहे हैं।
6 गिरफ्तार, 16 के खिलाफ मामला दर्ज
इस पूरे मामले का मास्टरमाइंड शिवम अग्रवाल बताया जा रहा है, जो आहूजा अस्पताल में कर्मचारी था लेकिन खुद को डॉक्टर बताकर काम कर रहा था। अब तक पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है, जिनमें आईएमए कानपुर की उपाध्यक्ष डॉ. प्रीति आहूजा, उनके पति डॉ. सुरजीत, तीन अस्पताल संचालक और दलाल शिवम अग्रवाल शामिल हैं। पुलिस ने 15 अन्य लोगों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है।

जांच में सामने आया है कि यह पूरा नेटवर्क बेहद संगठित तरीके से काम करता था, जिसमें किडनी डोनर को ₹5–10 लाख दिए जाते थे और मरीजों से ₹60 लाख से ₹1 करोड़ तक वसूले जाते थे। लेनदेन टेलीग्राम के जरिए किया जाता था और ट्रांसप्लांट देर रात गुप्त रूप से किए जाते थे। सुरक्षा के लिए CCTV कैमरे बंद कर दिए जाते थे और स्टाफ को घर भेज दिया जाता था।
किडनी ट्रांसप्लांट कराने वाले मरीज की हालत गंभीर
कानपुर के कई इलाकों जैसे रावतपुर, किदवई नगर, बर्रा, कल्याणपुर, काकादेव और सिविल लाइंस के नर्सिंग होम जांच के घेरे में हैं। इसके अलावा लखनऊ के एक अस्पताल की भी जांच की जा रही है। इस मामले में बिहार के रहने वाले आयुष नाम के युवक ने अपनी किडनी बेची थी, जिसके लिए उसे करीब ₹10 लाख का ऑफर दिया गया था, लेकिन उसे केवल ₹9.5 लाख ही मिले।
वहीं किडनी प्राप्त करने वाली मरीज पारुल तोमर (मेरठ) की हालत गंभीर बताई जा रही है। डॉक्टरों के अनुसार उनकी किडनी ठीक से काम नहीं कर रही है और संक्रमण का खतरा भी बना हुआ है।

विशेषज्ञों ने इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि मरीज के पास सही मेडिकल रिकॉर्ड नहीं हैं और किडनी रिजेक्शन का खतरा बना हुआ है, साथ ही संक्रमण और अन्य जटिलताएं भी हो सकती हैं। जांच में यह भी देखा जा रहा है कि ट्रांसप्लांट के दौरान सभी कानूनी प्रक्रियाओं का पालन किया गया या नहीं। पुलिस इस पूरे नेटवर्क से जुड़े दिल्ली-एनसीआर के डॉक्टरों और दलालों की तलाश कर रही है और कई टीमें छापेमारी और जांच में जुटी हुई हैं।
यह किडनी रैकेट एक बड़े अवैध अंग व्यापार नेटवर्क को उजागर करता है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। प्रशासन अब सभी आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की तैयारी में है।
