बिना वेरिफिकेशन के संवेदनशील जगह पर तैनाती का खुलासा
वाराणसी। अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे की राशि में हुई गड़बड़ी के मामले की परतें अब वाराणसी तक खुल रही हैं। इस मामले की जांच कर रही विशेष जांच टीम (SIT) ने अपनी कार्रवाई का दायरा बढ़ाते हुए वाराणसी में डेरा डाल दिया है। मामले में ‘सैनिक सिक्योरिटी फर्म’ की संलिप्तता सामने आने के बाद, जांच दल ने कंपनी के प्रोपराइटर गौरव सिंह और उनके सुपरवाइजर को तलब कर विस्तृत पूछताछ की है।
‘हमारा कोई सीधा हाथ नहीं’ — सिक्योरिटी फर्म के मालिक की सफाई
सारनाथ में स्थित इस सुरक्षा एजेंसी के संचालक गौरव सिंह ने मीडिया के सामने आकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने कहा:
“हमारी कंपनी पिछले 26 वर्षों से इस क्षेत्र में काम कर रही है और हमारी प्रतिष्ठा बेदाग है। हमने अपनी तरफ से सीधे अयोध्या राम मंदिर में किसी भी स्टाफ को नियुक्त नहीं किया था। भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के मुख्य प्रबंधक ने हाउसकीपिंग के कार्यों के लिए इन कर्मियों की सेवाएं ली थीं। वे कर्मचारी वहां तक कैसे और किन परिस्थितियों में पहुंचे, इसका सही जवाब केवल स्टेट बैंक के मुख्य प्रबंधक ही दे सकते हैं।”
नियमों को ताक पर रखकर दी गई एंट्री: 6 कर्मचारी रडार पर
एसआईटी की शुरुआती छानबीन में सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर बेहद चौंकाने वाली लापरवाही सामने आई है:
- बिना सत्यापन के तैनाती: जांच में यह बात खुलकर सामने आई है कि मंदिर के अत्यंत सुरक्षित और संवेदनशील कोष विभाग में जिन कर्मचारियों को तैनात किया गया था, उनका कोई पुलिस या आधिकारिक बैकग्राउंड वेरिफिकेशन (सत्यापन) नहीं कराया गया था।
- गिनती का ठेका: दरअसल, एसबीआई की अयोध्या शाखा ने राम मंदिर में आने वाले भारी दान की राशि को गिनने के लिए ‘सैनिक सिक्योरिटी एजेंसी’ को मैनपावर सप्लाई करने का टेंडर (ठेका) दिया था।
- हाउसकीपिंग के नाम पर २२ कर्मी: इस व्यवस्था के तहत एजेंसी ने मंदिर ट्रस्ट को हाउसकीपिंग कार्यों के लिए कुल 22 कर्मचारी सौंपे थे।
- पूछताछ जारी: जांच एजेंसी ने इन 22 कर्मियों में से 6 संदिग्ध लोगों को मुख्य रूप से अपने रडार पर लिया है। संदेह के घेरे में आए इन सभी व्यक्तियों से एसआईटी कड़ी पूछताछ कर रही है ताकि चोरी के इस पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
