वाराणसी। चौबेपुर थाना क्षेत्र से अगवा की गई एक 17 वर्षीय किशोरी को कानपुर में 1 लाख रुपये में बेच दिया गया। पुलिस ने इस अंतरजनपदीय मानव तस्करी रैकेट का पर्दाफाश करते हुए एक महिला सहित कुल पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वहीं, इस संवेदनशील मामले में घोर लापरवाही बरतने और आरोपियों को संरक्षण देने के आरोप में पुलिस कमिश्नर ने सख्त कार्रवाई करते हुए चौबेपुर थाना प्रभारी को तत्काल प्रभाव से लाइन हाजिर कर दिया है।
एक महीने तक बंधक रही पीड़िता, पुलिस बनी रही मूकदर्शक
घटनाक्रम के अनुसार, किशोरी बीते 6 जून 2026 की रात को अपने घर से रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हो गई थी। काफी खोजबीन के बाद जब उसका कोई सुराग नहीं मिला, तो परिजनों ने स्थानीय पुलिस चौकी को लिखित शिकायत दी। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने इस मामले को बिल्कुल गंभीरता से नहीं लिया और फाइल को ठंडे बस्ते में डाल दिया। इस ढुलमुल रवैये के कारण पीड़िता करीब एक महीने तक तस्करों और दरिंदों के चंगुल में शोषण का शिकार होती रही।
एक फोन कॉल से खुला राज
लापरवाह पुलिस के भरोसे बैठी किशोरी की किस्मत तब बदली जब 3 जुलाई 2026 को उसने किसी तरह एक गोपनीय मोबाइल नंबर से अपने परिवार को फोन किया। फोन पर रोते हुए उसने अपनी दर्दनाक दास्तां सुनाई। पीड़िता ने बताया कि इलाके के ही दो युवक उसे जबरन उठा ले गए थे। उन्होंने पहले उसे अपनी चाची की निगरानी में बंधक बनाकर रखा और बाद में 1 लाख रुपये लेकर उसे कानपुर के तस्करों को बेच दिया, जहाँ वह बेहद दयनीय स्थिति में कैद थी।
पुलिस कमिश्नर के दखल के बाद एक्शन, आरोपियों पर मेहरबानी की कोशिश नाकाम
किशोरी की आपबीती सुनकर परिजनों ने न्याय के लिए सीधे पुलिस कमिश्नर का दरवाजा खटखटाया। कमिश्नर के कड़े आदेश के बाद आखिरकार 5 जुलाई 2026 को चौबेपुर थाने में नामजद मुकदमा दर्ज किया गया।
शुरुआती जांच में पुलिस ने स्थानीय आरोपी शिवधनी, राहुल भारद्वाज और मैना देवी को हिरासत में लिया। इनसे मिली कड़ियों के आधार पर पुलिस ने लड़की को खरीदने और इस घिनौने नेटवर्क को चलाने वाले मोहित (निवासी बुलंदशहर) और नेम सिंह (निवासी मथुरा) को भी धर दबोचा।
सूत्रों के अनुसार, शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने इस गंभीर मानव तस्करी के मामले को महज़ ‘जबरन शादी’ का रूप देकर रफा-दफा करने और आरोपियों को बचाने का प्रयास किया था। लेकिन चौतरफा फजीहत और पुलिस कमिश्नर के कड़े रुख के बाद पुलिस को अपनी कहानी बदलनी पड़ी।
फिलहाल, पुलिस ने पांचों आरोपियों को कानूनी प्रक्रिया पूरी कर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया है। पीड़ित परिवार अभी भी इस सदमे से उबर नहीं पाया है और मामले में चुप्पी साधे हुए है।
