गंगा सप्तमी के पावन पर्व पर वाराणसी के दशाश्वमेध घाट पर एक बार फिर भक्ति और आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। विश्व प्रसिद्ध गंगा आरती में शामिल होने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु यहां पहुंचे और मां गंगा के चरणों में अपनी श्रद्धा अर्पित की। गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित इस विशेष आरती ने पूरे घाट को आध्यात्मिक ऊर्जा से भर दिया।

विधि-विधान से हुआ पूजन
इस पावन अवसर पर धार्मिक अनुष्ठानों की शुरुआत मां गंगा के दुग्धाभिषेक से हुई, जिसके बाद पारंपरिक विधि से षोडशोपचार पूजन संपन्न किया गया। वैदिक मंत्रों की गूंज और विधिवत पूजन के बीच वातावरण पूरी तरह भक्तिमय और दिव्य बन गया, जिसे देखकर श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।
विशेष श्रृंगार और भक्ति का संगम
मां गंगा और भगवान विश्वनाथ की अष्टधातु प्रतिमाओं का विशेष श्रृंगार किया गया, जिसने पूरे आयोजन की भव्यता को और बढ़ा दिया। दीपों की जगमगाहट, घंटियों की ध्वनि और मंत्रोच्चार ने घाट को एक अलौकिक रूप दे दिया, जहां हर कोई आध्यात्मिक अनुभूति में डूबा नजर आया।

श्रद्धालुओं की भारी भीड़
इस आयोजन में गंगा सेवा निधि के अध्यक्ष सुशांत मिश्रा, कोषाध्यक्ष आशीष तिवारी और सचिव हनुमान यादव सहित बड़ी संख्या में स्थानीय लोग और बाहर से आए श्रद्धालु मौजूद रहे। सभी ने मिलकर इस दिव्य आरती का आनंद लिया। गंगा सप्तमी के अवसर पर आयोजित यह भव्य गंगा आरती काशी की सनातन परंपरा, आस्था और संस्कृति का जीवंत प्रतीक बनकर सामने आई। यहां श्रद्धा, भक्ति और आध्यात्मिक ऊर्जा का अद्भुत संगम देखने को मिला।
