वाराणसी/लखनऊ/भोपाल। उत्तर प्रदेश पुलिस विभाग में हाल ही में हुए प्रशासनिक फेरबदल के बाद युवा और तेज़तर्रार आईपीएस अधिकारी Lipi Nagayach एक बार फिर चर्चा में हैं। 2022 बैच की इस अधिकारी को गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट से वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) के पद पर तैनात किया गया है। उनकी यह नई पोस्टिंग इसलिए भी अहम मानी जा रही है क्योंकि अब उन्हें काशी जैसे संवेदनशील और हाई-प्रोफाइल शहर में कानून-व्यवस्था की बड़ी जिम्मेदारी संभालनी होगी।
भोपाल से शुरू हुआ सफर, बड़ा सपना लेकर आगे बढ़ीं
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के करेली क्षेत्र की रहने वाली लिपि नगायच का बचपन सामान्य परिवेश में बीता, लेकिन उनके सपने असाधारण थे। पढ़ाई के शुरुआती दिनों से ही उनका झुकाव प्रशासनिक सेवाओं की ओर था। परिवार और शिक्षकों के अनुसार, वे शुरू से ही अनुशासित, मेहनती और लक्ष्य पर केंद्रित छात्रा रही हैं।
उन्होंने राजनीति विज्ञान में स्नातक (BA Hons) और परास्नातक (MA) की डिग्री हासिल की। इसी दौरान उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी।
UPSC की कठिन परीक्षा में शानदार सफलता
लिपि नगायच ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) सिविल सेवा परीक्षा 2021 में ऑल इंडिया रैंक 140 हासिल कर आईपीएस सेवा में जगह बनाई। यह सफलता उनके लिए ही नहीं बल्कि उनके परिवार के लिए भी बेहद भावनात्मक क्षण था।
महज 23 वर्ष की उम्र में आईपीएस बनकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि मजबूत इच्छाशक्ति और निरंतर मेहनत से किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है।

नाना से किया वादा बना सबसे बड़ी प्रेरणा
उनकी सफलता की कहानी में भावनात्मक पहलू भी जुड़ा हुआ है। बताया जाता है कि कोरोना महामारी के दौरान जब उनके नाना रामप्रिय शरण तिवारी की तबीयत गंभीर हुई, तब लिपि ने उनसे वादा किया था कि वे अफसर बनकर दिखाएंगी।
यह वादा उनके जीवन का टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। उन्होंने इसे केवल एक भावनात्मक बात नहीं रहने दिया, बल्कि इसे अपने लक्ष्य में बदल दिया और दिन-रात मेहनत कर UPSC की तैयारी की।
ज्योतिषीय भविष्यवाणी भी बनी चर्चा का विषय
लिपि नगायच की कहानी में एक दिलचस्प पहलू उनकी कुंडली से जुड़ी एक भविष्यवाणी भी है। परिवार के अनुसार, जब वे छोटी थीं तब उनकी कुंडली देखकर यह कहा गया था कि वे 24 वर्ष की उम्र तक अधिकारी बन सकती हैं।
दिलचस्प बात यह रही कि उन्होंने यह लक्ष्य और भी जल्दी हासिल किया और 23 वर्ष की उम्र में ही आईपीएस बन गईं।
पुलिस सेवा में शुरुआती जिम्मेदारियां और अनुभव
आईपीएस बनने के बाद लिपि नगायच को उत्तर प्रदेश पुलिस में विभिन्न महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों पर काम करने का अवसर मिला। गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) रहते हुए उन्होंने कई संवेदनशील मामलों में तेजी से कार्रवाई की।
उनकी कार्यशैली को एक ऐसे अधिकारी के रूप में देखा जाता है जो फील्ड में सक्रिय रहती हैं और कानून-व्यवस्था को लेकर सख्त रुख अपनाती हैं।
गाजियाबाद से वाराणसी तक का सफर
हालिया ट्रांसफर सूची में उन्हें गाजियाबाद से वाराणसी भेजा गया है, जहां वे ADCP के पद पर कार्यभार संभालेंगी। वाराणसी पुलिस कमिश्नरेट में यह पद अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है क्योंकि यह शहर धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से अहम है।
उनकी नियुक्ति से उम्मीद की जा रही है कि शहर की कानून-व्यवस्था और अधिक मजबूत होगी।
वाराणसी में नई चुनौतियाँ और जिम्मेदारियां
- शहर की ट्रैफिक और भीड़ नियंत्रण व्यवस्था
- त्योहारों और धार्मिक आयोजनों के दौरान सुरक्षा प्रबंधन
- अपराध नियंत्रण और त्वरित जांच प्रक्रिया
- पुलिसिंग को और अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनाना
विशेषज्ञों का मानना है कि युवा अफसर होने के कारण वे नई तकनीक और आधुनिक पुलिसिंग तरीकों को बेहतर तरीके से लागू कर सकती हैं।
युवा पीढ़ी के लिए प्रेरणा
लिपि नगायच की कहानी आज लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी है। सीमित समय में UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास करना, पारिवारिक जिम्मेदारियों को प्रेरणा बनाना और लगातार आगे बढ़ते रहना—ये सभी बातें उन्हें एक अलग पहचान देती हैं।
उनका सफर यह संदेश देता है कि सही दिशा, मेहनत और आत्मविश्वास के साथ कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।
भोपाल से शुरू होकर वाराणसी तक का उनका यह सफर एक साधारण छात्रा से आईपीएस अधिकारी बनने की प्रेरणादायक कहानी है। अब काशी में उनकी नई भूमिका पर सबकी नजरें होंगी कि वे अपनी कार्यशैली से किस तरह शहर की कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाती हैं।
