• Banaras Now, Varanasi
  • April 18, 2026

लखनऊ। साल 2004 के चर्चित फायरिंग मामले में लखनऊ की एमपी-एमएलए कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने मुख्तार अंसारी पर हुए कथित हमले के केस में पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह समेत पांचों आरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया।

कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोप साबित नहीं कर सका, इसलिए आरोपियों को संदेह का लाभ देते हुए दोषमुक्त किया जाता है।

क्या था मामला?

यह घटना 13 जनवरी 2004 की है। लखनऊ के कैंट इलाके में सदर रेलवे क्रॉसिंग के पास मुख्तार अंसारी और कृष्णानंद राय के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच फायरिंग हुई थी, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई थी।

मुख्तार अंसारी ने इस मामले में बृजेश सिंह समेत कई लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास और अन्य गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था। वहीं, दूसरे पक्ष ने भी पलटकर मुकदमा दर्ज कराया था।

किन लोगों को मिली राहत?

  • बृजेश सिंह
  • त्रिभुवन सिंह
  • आनंद राय
  • सुनील राय
  • अजय सिंह उर्फ गुड्डू

फैसले के समय बृजेश सिंह कोर्ट में मौजूद रहे, जबकि अन्य आरोपियों को जेल से पेश किया गया।

गवाहों के कारण कमजोर पड़ा केस

सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को मजबूत तरीके से साबित नहीं कर पाया।

  • कुल 11 गवाहों में से 7 गवाह अपने बयान से पलट गए
  • 4 गवाहों की गवाही में भी काफी विरोधाभास देखने को मिला

इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि आरोप साबित नहीं होते हैं और सभी आरोपियों को बरी कर दिया गया।

वकीलों का पक्ष

बचाव पक्ष के वकीलों का कहना था कि यह मामला दो गुटों के बीच टकराव का था, जिसमें दोनों तरफ से आरोप लगाए गए थे। उनका कहना था कि लंबे समय में सबूत कमजोर हो गए, जिसका असर केस पर पड़ा।

2005 में हुई थी बड़ी वारदात

इस घटना के एक साल बाद 2005 में कृष्णानंद राय की हत्या कर दी गई थी। उनके काफिले पर कई राउंड फायरिंग हुई थी, जिसमें छह लोगों की मौत हो गई थी। यह मामला भी काफी चर्चा में रहा था।

अब क्या है स्थिति?

इस केस से जुड़े कई बड़े नाम अब इस दुनिया में नहीं हैं, जिनमें मुख्तार अंसारी भी शामिल हैं। समय के साथ यह मामला अब सिर्फ एक कानूनी केस नहीं, बल्कि प्रदेश के अपराध और राजनीति के इतिहास का हिस्सा बन गया है।

लंबी कानूनी प्रक्रिया का अंत

करीब 22 साल तक चले इस मामले में आखिरकार अदालत ने साफ कर दिया कि बिना पुख्ता सबूत किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। इस फैसले के साथ ही एक लंबे समय से चल रहा मामला खत्म हो गया और सभी आरोपियों को राहत मिल गई।

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