वाराणसी: चौकाघाट स्थित गिरजादेवी सांस्कृतिक संकुल सभागार में शुक्रवार को ‘नारी शक्ति वंदन, सशक्त नारी–सशक्त भारत’ विषय पर एक भव्य कार्यक्रम और प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी और उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में महिलाओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं और राजनीतिक प्रतिनिधियों की उपस्थिति ने इसे विशेष बना दिया।
कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसके बाद ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ (महिला आरक्षण बिल) पर विस्तार से चर्चा की गई। अपने संबोधन में स्मृति ईरानी ने महिला सशक्तिकरण को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों और उपलब्धियों को विस्तार से रखा।

विपक्ष पर साधा निशाना
प्रेस वार्ता के दौरान स्मृति ईरानी ने महिला आरक्षण बिल को लेकर विपक्ष पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि विपक्ष को इस बिल को सर्वसम्मति से पारित करना चाहिए, अन्यथा महिलाएं लोकतांत्रिक तरीके से जवाब देंगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह किसी प्रकार की चेतावनी नहीं, बल्कि एक विनम्र आग्रह है कि महिलाओं के अधिकारों के मुद्दे पर राजनीति से ऊपर उठकर निर्णय लिया जाए।
सपा प्रमुख अखिलेश यादव के बयान पर पलटवार करते हुए ईरानी ने कहा कि अगर उनमें दम है तो वे अपने पारंपरिक गढ़ से बाहर जाकर चुनाव जीतकर दिखाएं। उन्होंने कहा कि उन्होंने स्वयं कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष को उनके गढ़ में हराकर अपनी राजनीतिक क्षमता साबित की है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि अनावश्यक टिप्पणियों से महिलाओं के सम्मान को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।
महिला आरक्षण बिल पर स्पष्ट रुख
महिला आरक्षण बिल को लेकर उठ रहे सवालों पर ईरानी ने कहा कि भारतीय संविधान में धर्म के आधार पर आरक्षण का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि सभी राजनीतिक दलों को इस ऐतिहासिक बिल के समर्थन में खड़ा होना चाहिए, ताकि देश की महिलाओं को उनका अधिकार मिल सके।
उन्होंने आगे कहा कि ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ केवल एक कानून नहीं, बल्कि देश की आधी आबादी के सम्मान, अधिकार और भागीदारी का प्रतीक है। इसके लागू होने से संसद और विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण सुनिश्चित होगा, जिससे नीति-निर्माण में उनकी प्रभावी भूमिका बढ़ेगी।
महिलाओं के सशक्तिकरण पर जोर
स्मृति ईरानी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कई ऐतिहासिक कदम उठाए हैं। ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’, ‘सुकन्या समृद्धि योजना’, ‘उज्ज्वला योजना’ और ‘मातृ वंदना योजना’ जैसी योजनाओं ने महिलाओं के जीवन स्तर में व्यापक सुधार किया है।
उन्होंने कहा कि इन योजनाओं के माध्यम से न केवल महिलाओं को आर्थिक और सामाजिक रूप से सशक्त बनाया गया है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर भी मिला है। अब महिला आरक्षण कानून के माध्यम से राजनीति, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्र में भी महिलाओं की भागीदारी को और मजबूती मिलेगी।
उपमुख्यमंत्री का संबोधन
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि काशी की पवित्र धरती सदियों से नारी शक्ति की उपासक रही है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को निर्णय लेने की प्रक्रिया में शामिल करना एक विकसित और समृद्ध भारत के निर्माण के लिए अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने यह भी कहा कि केंद्र और राज्य सरकार ‘सबका साथ, सबका विकास’ के सिद्धांत पर काम करते हुए समाज के हर वर्ग, विशेषकर महिलाओं के उत्थान के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण को भी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल बताया।
बड़ी संख्या में शामिल हुईं महिलाएं
कार्यक्रम में हजारों की संख्या में महिलाओं की भागीदारी देखने को मिली। उपस्थित महिलाओं ने ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ के लिए प्रधानमंत्री और केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं में उत्साह और जागरूकता साफ तौर पर देखने को मिली।
इस मौके पर डॉ. नीरजा माधव, मृदुला जायसवाल, साधना वेदांती, रचना अग्रवाल, पूनम मौर्या, डॉ. आनंद प्रभा, अपराजिता सोनकर, मीना चौबे, रिचा सिंह सहित अनेक सामाजिक और राजनीतिक हस्तियां उपस्थित रहीं। साथ ही क्षेत्रीय अध्यक्ष दिलीप पटेल, महानगर अध्यक्ष प्रदीप अग्रहरि, मेयर अशोक तिवारी, राज्य मंत्री रविंद्र जायसवाल सहित कई जनप्रतिनिधियों की भी सहभागिता रही।
कार्यक्रम का समापन
कार्यक्रम का समापन महिलाओं की राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भागीदारी और सशक्त भारत के निर्माण के संकल्प के साथ हुआ। वक्ताओं ने कहा कि जब तक देश की महिलाएं पूरी तरह सशक्त नहीं होंगी, तब तक भारत का समग्र विकास संभव नहीं है।
इस आयोजन ने न केवल महिला सशक्तिकरण के मुद्दे को मजबूती से उठाया, बल्कि समाज में जागरूकता फैलाने का भी काम किया।
