• Banaras Now, Varanasi
  • April 18, 2026

वाराणसी: शहर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हो गए हैं। ट्रॉमा सेंटर में इलाज के लिए पहुंचने वाले मरीजों और उनके तीमारदारों ने गंभीर आरोप लगाए हैं कि यहां एक्स-रे जैसी निशुल्क सुविधा के बावजूद कर्मचारियों द्वारा फिल्म के नाम पर पैसे वसूले जा रहे हैं।

अस्पताल परिसर में स्पष्ट रूप से लिखा है कि एक्स-रे पूरी तरह मुफ्त है, लेकिन जमीनी हकीकत इससे उलट नजर आ रही है। मरीजों से 100 से 200 रुपये तक की मांग किए जाने की शिकायतें सामने आई हैं, जिससे आम लोगों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है।

पहले बहाना, फिर पैसों की मांग

मरीजों के परिजनों का कहना है कि एक्स-रे कक्ष में पहुंचने पर पहले उन्हें बताया जाता है कि फिल्म उपलब्ध नहीं है। इसके बाद यह भी कहा जाता है कि डॉक्टर मोबाइल या डिजिटल रिपोर्ट स्वीकार नहीं करेंगे। ऐसे में मरीजों की मजबूरी का फायदा उठाते हुए उनसे सीधे पैसे मांगे जाते हैं।

यह तरीका इतना व्यवस्थित हो चुका है कि कई मरीजों ने एक जैसी शिकायतें की हैं, जिससे यह अंदेशा भी जताया जा रहा है कि यह कोई अलग-थलग घटना नहीं बल्कि नियमित प्रक्रिया बन चुकी है।

मजदूर से वसूले गए पैसे

चोलापुर थाना क्षेत्र के कटारी गांव निवासी छेदीलाल गौड़, जो दिहाड़ी मजदूर हैं, काम के दौरान घायल हो गए थे। उन्हें इलाज के लिए ट्रॉमा सेंटर लाया गया, जहां डॉक्टर ने एक्स-रे कराने की सलाह दी।

परिजनों के अनुसार, एक्स-रे कक्ष में मौजूद कर्मचारी ने पहले फिल्म उपलब्ध न होने की बात कही। बाद में 100 रुपये देने पर ही एक्स-रे फिल्म दी गई। मजबूरी में परिजनों को पैसे देने पड़े, जिसके बाद ही जांच पूरी हो सकी।

बच्चे के इलाज में भी वसूली का आरोप

इसी तरह धरसौना गांव निवासी सुदर्शन अपने 12 वर्षीय भतीजे अंकुश को एक्स-रे के लिए अस्पताल लेकर पहुंचे थे। उन्होंने भी आरोप लगाया कि उनसे 100 रुपये लेकर ही फिल्म उपलब्ध कराई गई। लगातार सामने आ रही ऐसी घटनाओं ने अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

ट्रॉमा सेंटर की बदहाल व्यवस्था

अस्पताल में सिर्फ वसूली ही नहीं, बल्कि बुनियादी सुविधाओं की कमी भी सामने आई है। ट्रॉमा सेंटर के बाहर कई स्ट्रेचर मौजूद हैं, लेकिन उन्हें चेन से बांधकर रखा गया है।

इस वजह से गंभीर हालत में आने वाले मरीजों को परिजन गोद में उठाकर या सहारा देकर अंदर तक ले जाने को मजबूर हैं। यह स्थिति न सिर्फ असुविधाजनक है बल्कि मरीजों की जान के लिए भी जोखिम भरी साबित हो सकती है।

प्रशासन पर उठ रहे सवाल

लगातार सामने आ रही शिकायतों से यह सवाल उठ रहा है कि जब अस्पताल में सेवाएं निशुल्क घोषित हैं, तो फिर मरीजों से पैसे कैसे लिए जा रहे हैं? क्या यह कर्मचारियों की व्यक्तिगत हरकत है या फिर सिस्टम में ही कोई खामी है?

स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस पर कार्रवाई नहीं हुई, तो आम जनता का भरोसा सरकारी अस्पतालों से उठ सकता है।

अधीक्षक का बयान

इस पूरे मामले पर अस्पताल के अधीक्षक डॉ. आरएस राम ने कहा कि एक्स-रे सेवा पूरी तरह मुफ्त है और किसी भी मरीज से पैसे नहीं लिए जाने चाहिए। उन्होंने आश्वासन दिया कि यदि जांच में किसी कर्मचारी की संलिप्तता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

मरीजों में बढ़ती नाराजगी

मरीजों और उनके परिजनों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में इस तरह की वसूली बेहद गंभीर मामला है। लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि व्यवस्था में सुधार किया जाए और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई हो, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाएं न हों।

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