वाराणसी: शहर में निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी फीस और ड्रेस-स्टेशनरी के नाम पर हो रही वसूली के खिलाफ अब अभिभावक खुलकर सामने आ गए हैं। बुधवार को काशी अभिभावक संघ का एक प्रतिनिधिमंडल जिलाधिकारी वाराणसी से मिला और विस्तृत शिकायत दर्ज कराते हुए सख्त कार्रवाई की मांग की। साथ ही चेतावनी दी गई कि यदि जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन किया जाएगा।
DM से मुलाकात, रखीं कई गंभीर शिकायतें
प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी को दिए ज्ञापन में बताया कि उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा लागू “यू.पी. स्ववित्तपोषित स्वतंत्र विद्यालय (शुल्क का निर्धारण) अधिनियम-2018” के बावजूद निजी स्कूल नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इस अधिनियम के तहत मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति द्वारा फीस तय की जानी चाहिए और वही शुल्क स्कूलों की वेबसाइट पर सार्वजनिक कर अभिभावकों से लिया जाना चाहिए। लेकिन हकीकत इसके उलट है—शहर के कई निजी स्कूल मनमाने तरीके से अत्यधिक फीस वसूल रहे हैं।
री-एडमिशन फीस और अन्य चार्ज पर सवाल
अभिभावक संघ के सदस्यों ने बताया कि री-एडमिशन फीस पर रोक होने के बावजूद स्कूल हर साल अभिभावकों से यह शुल्क वसूल रहे हैं। इसके अलावा एडमिशन, रजिस्ट्रेशन और अन्य मदों में भी भारी रकम ली जा रही है। अधिवक्ता डॉ. शम्मी कुमार सिंह ने कहा कि यह सीधे तौर पर सरकार के नियमों का उल्लंघन है और अभिभावकों का आर्थिक शोषण किया जा रहा है।
महंगी किताबें और स्टेशनरी से अभिभावक परेशान
ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि NCERT की सस्ती किताबों के बजाय निजी प्रकाशकों की महंगी किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है। साथ ही स्कूल यूनिफॉर्म और स्टेशनरी भी तय दुकानों से ही खरीदने का दबाव बनाया जाता है। अधिवक्ता राजन पांडेय ने कहा कि ड्रेस, एजुकेशनल टूर, कल्चरल एक्टिविटी जैसे नामों पर हजारों-लाखों रुपये वसूले जा रहे हैं, जिससे अभिभावक आर्थिक रूप से परेशान हैं।
बिना मान्यता के स्कूल चलाने का आरोप
अभिषेक श्रीवास्तव ने आरोप लगाया कि कई स्कूल बिना मान्यता के ही संचालित हो रहे हैं। वहीं अधिवक्ता आयुषचंद्र राजपूत ने कहा कि आरटीई के तहत 25% गरीब बच्चों को मुफ्त शिक्षा देने का प्रावधान है, लेकिन कई स्कूल उनसे भी फीस वसूल रहे हैं। अभिभावक संघ ने साफ कहा कि यदि उनकी मांगों पर जल्द कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।
प्रशासन का आश्वासन: सख्त कार्रवाई होगी
जिलाधिकारी वाराणसी ने प्रतिनिधिमंडल को भरोसा दिलाया कि शिकायतों को गंभीरता से लिया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही एक आदेश जारी कर री-एडमिशन फीस, ड्रेस, किताब और स्टेशनरी के नाम पर हो रही वसूली पर रोक लगाई जाएगी। DM ने अभिभावकों से अपील की कि यदि कोई स्कूल नियमों का उल्लंघन करता है तो वे व्यक्तिगत रूप से शिकायत करें। शिकायतकर्ता और बच्चों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी। दोषी स्कूलों पर आर्थिक दंड के साथ उनकी मान्यता तक रद्द की जा सकती है। साथ ही बिना मान्यता संचालित स्कूलों की सूची देने को कहा गया है, ताकि उनके खिलाफ तुरंत कार्रवाई की जा सके।
अभिभावकों का समर्थन
इस प्रतिनिधिमंडल में कई अन्य अधिवक्ता और अभिभावक भी शामिल रहे, जिनमें राजेश राजपूत, अंकुर सिंह, अंकित पांडेय, ठाकुर कुश प्रताप, जितेंद्र सिंह, रोहित पांडेय, अंकित सेठ, राहुल, देवेंद्र पांडेय और राहुल नागवानी समेत दर्जनों लोग मौजूद थे।
