• Banaras Now, Varanasi
  • April 27, 2026

वाराणसी। काशी के अस्सी क्षेत्र स्थित जगन्नाथ मंदिर का स्वरूप अब पूरी तरह बदलने जा रहा है। काशी के प्रमुख धार्मिक स्थलों में गिने जाने वाले इस मंदिर का व्यापक जीर्णोद्धार किया जाएगा, जिसके तहत मंदिर के शिखर को वर्तमान से कई गुना ऊंचा बनाया जाएगा। प्रस्तावित योजना के अनुसार मंदिर का शिखर 108 फीट ऊंचा किया जाएगा, जिसे शास्त्रीय परंपराओं के अनुरूप डिजाइन किया जा रहा है।

दूर से भी होगा दर्शन का लाभ

मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के अनुसार, शिखर की ऊंचाई बढ़ाने के पीछे मुख्य उद्देश्य यह है कि जो श्रद्धालु मंदिर परिसर तक नहीं पहुंच पाते, वे दूर से ही शिखर के दर्शन कर धार्मिक लाभ प्राप्त कर सकें। यदि शासन से अनुमति मिलती है, तो शिखर की ऊंचाई को और अधिक बढ़ाने पर भी विचार किया जा सकता है।

1 मई को शिलान्यास, शंकराचार्य होंगे मुख्य अतिथि

मंदिर के पुनर्निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत 1 मई को होगी। इस अवसर पर कांची पीठ के जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी शंकरविजयेंद्र सरस्वती शिलान्यास करेंगे। मंदिर ट्रस्ट के अनुसार जीर्णोद्धार के पहले चरण की योजना तैयार कर ली गई है और कार्य चरणबद्ध तरीके से आगे बढ़ाया जाएगा।

36 फीट से बढ़कर 108 फीट होगा शिखर

वर्तमान में मंदिर के शिखर की ऊंचाई लगभग 36 फीट है, जिसे बढ़ाकर 108 फीट करने का लक्ष्य रखा गया है। इसके साथ ही मंदिर परिसर को आधुनिक सुविधाओं से भी जोड़ा जाएगा, ताकि श्रद्धालुओं को बेहतर व्यवस्था मिल सके।

परंपरा के साथ आधुनिकता का संगम

मंदिर की रसोई को आधुनिक रूप दिया जाएगा, लेकिन भगवान का भोग पारंपरिक तरीके से ही तैयार किया जाएगा। यानी मिट्टी के चूल्हे पर लकड़ी की आंच में ही प्रसाद बनाया जाएगा, जिससे परंपरा बनी रहे।

सामाजिक सुविधाओं का भी होगा विस्तार

मंदिर परिसर को केवल धार्मिक केंद्र ही नहीं, बल्कि सामाजिक गतिविधियों का केंद्र बनाने की भी योजना है। इसके तहत गुरुकुल, कौशल विकास केंद्र, धर्मशाला, आयुर्वेदिक औषधि केंद्र और पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी।

स्थानीय लोगों को मिलेगा रोजगार

मंदिर परिसर में लंबे समय से रह रहे लोगों के पुनर्वास को लेकर भी योजना बनाई गई है। ट्रस्ट के अनुसार अधिकांश लोगों ने स्वेच्छा से जगह खाली कर दी है, जबकि कुछ लोग शर्तों के साथ तैयार हुए हैं। ऐसे लोगों को भविष्य में माला-फूल, प्रसाद और अन्य सामग्री की दुकानें आवंटित की जाएंगी, ताकि उनकी आजीविका प्रभावित न हो।

शिलान्यास से पहले निकलेगी भव्य कलश यात्रा

1 मई को शिलान्यास कार्यक्रम से पहले महिलाओं द्वारा भव्य कलश यात्रा निकाली जाएगी। बड़ी संख्या में महिलाएं पारंपरिक वेशभूषा में सिर पर कलश रखकर मंदिर परिसर तक पहुंचेंगी। कार्यक्रम के दौरान 108 प्रतिभाशाली लोगों का सम्मान भी किया जाएगा और शंकराचार्य का आशीर्वचन प्राप्त होगा।

काशी को मिलेगा नया धार्मिक आयाम

यह पुनर्निर्माण न केवल मंदिर की भव्यता को बढ़ाएगा, बल्कि काशी की धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को भी एक नया आयाम देगा। आने वाले समय में यह स्थल श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए और अधिक आकर्षण का केंद्र बन सकता है।

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