वाराणसी। काशी के अस्सी स्थित ऐतिहासिक श्री जगन्नाथ मंदिर में जेठ माह की पूर्णिमा तिथि पर सोमवार को भगवान जगन्नाथ, भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा के वार्षिक स्नान पर्व का भव्य शुभारंभ हुआ। देश और समाज में सुख, समृद्धि तथा आरोग्यता की कामना को लेकर हजारों भक्तों ने भगवान का जलाभिषेक किया। सुबह से ही पूरा मंदिर परिसर ‘जय जगन्नाथ’ के जयकारों और वैदिक मंत्रोच्चार से गुंजायमान रहा।

स्नान पर्व की शुरुआत सोमवार प्रातः काल 5:15 बजे भव्य आरती और विशेष श्रृंगार के साथ हुई। मुख्य पुजारी राधेश्याम पांडे ने भगवान जगन्नाथ का गणेश स्वरूप में गुलाब, चंपा, चमेली, बेला और गेंदे के सुगंधित फूलों से अलौकिक श्रृंगार किया। महाआरती के संपन्न होने के बाद विग्रहों से भगवान गणेश का मुखौटा हटाया गया, जिसके बाद जलाभिषेक की मुख्य रस्म शुरू हुई। मंदिर ट्रस्ट के न्यासियों और सदस्यों ने सबसे पहले पवित्र नदियों के जल से भरे 108 कलशों से भगवान का महास्नान कराया। इसके बाद मंदिर के कपाट आम भक्तों के दर्शन और जलाभिषेक के लिए खोल दिए गए।

इस पावन अवसर पर अस्सी घाट से एक बेहद भव्य और आकर्षक कलश यात्रा निकाली गई। मातृ शक्तियों (महिलाओं) ने सिर पर पवित्र जल के कलश धारण कर अस्सी घाट से मंदिर परिसर तक की दूरी तय की। इस यात्रा के आगे-आगे चल रहे डमरू दल के सदस्यों द्वारा किए जा रहे डमरू वादन ने पूरे वातावरण को शिव-मयी और भक्तिमय बना दिया। मंदिर पहुँचकर महिलाओं ने कतारबद्ध होकर भगवान का जलाभिषेक किया और परिवार व समाज की खुशहाली की मन्नतें मांगीं।
धार्मिक अनुष्ठानों के बीच मंदिर के जीर्णोद्धार और निर्माण कार्य को भी बड़ा संबल मिला। समारोह के दौरान पूज्य स्वामी सदानंद महाराज ने मंदिर निर्माण के लिए 11 लाख रुपये का चेक मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष व पूर्व एमएलसी बृजेश सिंह को सौंपा। इस दौरान ट्रस्ट के अध्यक्ष बृजेश सिंह, उनकी पत्नी एमएलसी अन्नपूर्णा सिंह और पुत्र सिद्धार्थ सिंह ने पूरे विधि-विधान से भगवान का पूजन और जलाभिषेक किया। वहीं ट्रस्ट के सचिव शैलेश त्रिपाठी ने वेदपाठी ब्राह्मणों के मंत्रोच्चार के बीच अभिषेक की रस्म पूरी की।
इस भव्य धार्मिक उत्सव में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ स्वयंसेवक सुखदेव त्रिपाठी, हरीश वालिया, नवीन जी, शिशिर मालवीय, रामयश मिश्र, जगन्नाथ जी, दिलीप मिश्रा, आशु त्रिपाठी सहित काशी के प्रबुद्ध नागरिक और भारी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।
