वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की एक पूर्व महिला खिलाड़ी द्वारा लगाए गए यौन उत्पीड़न, मारपीट और कपड़े बदलते समय वीडियो बनाने के गंभीर आरोपों पर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम कोर्ट) ने कड़ा रुख अपनाया है। इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए अदालत ने विश्वविद्यालय के एक सुरक्षा अधिकारी को नोटिस जारी कर दिया है और मामले की अगली सुनवाई के लिए 8 जुलाई की तारीख तय की है। इस शिकायत में प्रॉक्टोरियल बोर्ड के एक सुरक्षा अधिकारी और 4 महिला सुरक्षाकर्मियों समेत कुल 7 लोगों को नामजद किया गया है।
पूर्व खिलाड़ी के अनुसार, यह पूरा विवाद साल 2023 से शुरू हुआ था जब वह विश्वविद्यालय में खेलती थीं। उन्होंने अपने प्रार्थना पत्र में आरोप लगाया है कि 13 जून 2023 को उन्हें करीब 12 घंटे तक बंधक बनाकर रखा गया था और दो महिलाओं ने उनके साथ मारपीट करते हुए उन्हें धमकी दी थी। पीड़िता का आरोप है कि इसी दौरान कपड़े बदलते समय उनका एक वीडियो भी गुपचुप तरीके से बनाया गया और उनका यौन उत्पीड़न किया गया।
पीड़िता ने अपनी याचिका में यह भी बताया कि उनके साथ प्रताड़ना का यह सिलसिला यहीं नहीं रुका। 9 सितंबर 2025 को जब वह प्रॉक्टोरियल बोर्ड के कार्यालय गई थीं, तब वहां मौजूद आरोपियों ने उनके साथ बदसलूकी और मारपीट की। इस दौरान वर्दी पहने एक आरोपी ने उन्हें जबरन पकड़ने (शाारीरिक शोषण) की कोशिश की और विरोध करने पर उनका मोबाइल फोन छीनकर जमीन पर फेंक कर तोड़ दिया, ताकि सबूत नष्ट किए जा सकें।
स्थानीय पुलिस और विश्वविद्यालय प्रशासन से कोई मदद न मिलने के बाद पीड़िता को अदालत की शरण लेनी पड़ी। उन्होंने कोर्ट को बताया कि उन्होंने सबसे पहले लंका थाने में शिकायत की थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। इसके बाद उन्होंने 24 जून 2026 को पुलिस आयुक्त को भी रजिस्टर्ड डाक के जरिए न्याय की गुहार लगाते हुए प्रार्थना पत्र भेजा, पर वहां से भी निराशा ही हाथ लगी। इस पूरे मामले पर बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर प्रोफेसर संदीप पोखरिया ने बयान दिया है कि मामला अब उनके संज्ञान में है और विश्वविद्यालय स्तर पर इसकी जांच की जा रही है।
