वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) प्रशासन ने परिसर की शांति, सुरक्षा और शैक्षणिक माहौल को बनाए रखने के लिए अब तक का सबसे बड़ा और सख्त रुख अपनाया है। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के नामांकन शुरू होने से ठीक पहले कुलसचिव (Registrar) कार्यालय ने उपद्रव, हिंसा और गंभीर अपराधों में शामिल रहे लगभग 110 दागी छात्रों की सूची सार्वजनिक कर दी है।
विश्वविद्यालय प्रशासन का यह निर्णय एक स्पष्ट संदेश है कि कैम्पस की गरिमा और सुरक्षा से समझौता करने वालों के लिए बीएचयू के दरवाजे हमेशा के लिए बंद किए जा रहे हैं।
चार श्रेणियों में बंटी दंडात्मक कार्रवाई
अपराध की गंभीरता और प्रकृति को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय ने इन छात्रों को चार अलग-अलग श्रेणियों में बांटकर कार्रवाई की है:
36 छात्रों पर स्थायी प्रतिबंध: इन छात्रों के बीएचयू में भविष्य में किसी भी प्रकार के पुनः प्रवेश और रोजगार पाने के सभी रास्ते पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं।
57 छात्र निलंबित: विश्वविद्यालय ने 57 छात्रों को अस्थायी रूप से निलंबित कर दिया है।
8 छात्रों के कैम्पस प्रवेश पर रोक: आठ ऐसे छात्र हैं जिनके बीएचयू परिसर में कदम रखने पर ही पूरी तरह पाबंदी लगा दी गई है।
निष्कासन व अन्य दंडात्मक कदम: इसके अतिरिक्त कई छात्रों को विश्वविद्यालय से निष्कासित कर अनुशासनात्मक दायरे में लाया गया है।
इन गंभीर मामलों के कारण हुई कार्रवाई
प्रशासन के अनुसार, यह सख्त कदम अलग-अलग सत्रों में घटी हिंसक और आपत्तिजनक घटनाओं में संलिप्तता के आधार पर उठाया गया है। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:
- एंबुलेंस चालक का अपहरण और हॉस्टल की संपत्तियों को नुकसान पहुंचाना।
- कुलपति आवास और मुख्य द्वार पर उग्र विरोध-प्रदर्शन।
- यौन उत्पीड़न और छात्राओं की सुरक्षा से जुड़े गंभीर अपराध।
- हाल की घटनाएं: 17 फरवरी 2026 को बिड़ला ‘ए’ हॉस्टल के बाहर हुई तोड़फोड़ मामले में कला संकाय के छात्र आदित्य शर्मा को भविष्य के सभी प्रवेशों से वंचित किया गया। वहीं 29 जनवरी 2026 को रुइया हॉस्टल गेट पर मारपीट के मामले में अंकित पाल, दर्शित पांडेय, पीयूष स्वामी और विशाल कुमार को निष्कासित कर दिया गया है।
सभी संकायों को निर्देश: काउंसलिंग में बरतें विशेष सतर्कता
यह कार्रवाई कला, विज्ञान, इंजीनियरिंग, चिकित्सा, कृषि, सामाजिक विज्ञान, कानून, वाणिज्य, महिला महाविद्यालय और संबद्ध कॉलेजों सहित सभी संकायों के छात्रों पर हुई है। कुलसचिव कार्यालय ने सभी संस्थानों के निदेशकों और संकायाध्यक्षों को ‘ब्लैकलिस्ट’ सौंप दी है। निर्देश दिए गए हैं कि नए सत्र की काउंसलिंग और दाखिले की प्रक्रिया के दौरान इन ब्लैकलिस्टेड छात्रों की गहन जांच की जाए ताकि कोई भी निष्कासित या दागी छात्र धोखे से दोबारा प्रवेश न पा सके।
