वाराणसी: धर्म और अध्यात्म की नगरी काशी में कार्तिक पूर्णिमा के पावन अवसर पर मनाए जाने वाले विश्वप्रसिद्ध ‘देव दीपावली’ महापर्व की भव्य तैयारियां शुरू हो गई हैं। पौराणिक मान्यता है कि इस पावन तिथि पर स्वयं देवी-देवता स्वर्गलोक से उतरकर पतितपावनी मां गंगा के तट पर दीप प्रज्वलित करते हैं। अर्धचंद्राकार घाटों पर दीपों की स्वर्णिम शृंखला के इस अलौकिक दृश्य का साक्षी बनने के लिए देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु और पर्यटक काशी पहुंचते हैं।
शुभ मुहूर्त और तिथि का विवरण
वैदिक पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि और दीपदान का समय इस प्रकार रहेगा:
- पूर्णिमा तिथि आरंभ: 23 नवंबर, रात्रि 11:42 बजे से
- पूर्णिमा तिथि समापन: 24 नवंबर, रात्रि 08:23 बजे तक
- महापर्व (उदयातिथि अनुसार): 24 नवंबर
- प्रदोष काल दीपदान मुहूर्त: 24 नवंबर, शाम 05:08 बजे से 07:47 बजे तक
10 लाख दीयों की रोशनी, लेजर शो और भव्य आतिशबाजी
इस वर्ष काशी के सभी 84 घाटों पर 10 लाख से अधिक मिट्टी के दीप एक साथ जगमगाएंगे। इसके अतिरिक्त गंगा पार रेतीले तट को भी लाखों दीयों से रोशन किया जाएगा। उत्सव के आकर्षण को दोगुना करने के लिए आधुनिक तकनीक पर आधारित लेजर शो और भव्य आतिशबाजी का आयोजन भी सुनिश्चित किया गया है।
दशाश्वमेध घाट पर राष्ट्रभक्ति और सुरों का संगम
घाटों पर विशेष महाआरती के साथ शास्त्रीय संगीत व नृत्य की प्रस्तुतियां होंगी। दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा ‘अमर जवान ज्योति’ की झांकी सजाकर देश के वीर शहीदों को श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी, जो इस आध्यात्मिक उत्सव को देशभक्ति के अनूठे रंग से जोड़ता है।
होटल और नौकाओं की अग्रिम बुकिंग में उछाल
पर्व को लेकर पर्यटकों का उत्साह चरम पर है। शहर के प्रमुख होटलों, गेस्ट हाउस और धर्मशालाओं में तेजी से कमरे बुक हो रहे हैं। गंगा दर्शन और आरती के लिए नावों व बजड़ों की बुकिंग को लेकर लगातार पूछताछ चल रही है, जिसके चलते आने वाले दिनों में सभी प्रतिष्ठानों के पूरी तरह हाउसफुल रहने का अनुमान है।
