वाराणसी: धर्मनगरी काशी में गंगा नदी के उफान ने विकराल रूप ले लिया है। पिछले 24 घंटों में जलस्तर में करीब 1.5 मीटर की भारी वृद्धि दर्ज की गई है, जिसके चलते काशी के 84 पक्के घाटों का आपसी संपर्क पूरी तरह टूट चुका है। सैलाब अब घाट की सीढ़ियों को लांघकर शहर की तंग गलियों और रिहायशी कॉलोनियों के मुहाने तक पहुंच गया है।
जल आयोग की चेतावनी: 6 सेमी प्रति घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा पानी
केंद्रीय जल आयोग (CWC) के अनुसार, गंगा का जलस्तर 6 सेंटीमीटर प्रति घंटे की तेज गति से ऊपर चढ़ रहा है।
- वर्तमान जलस्तर: 69.26 मीटर (रविवार शाम 4 बजे तक)
- खतरे का निशान: 71.26 मीटर
- ऐतिहासिक उच्चतम स्तर (HFL): 73.90 मीटर (वर्ष 1978)
यदि जलस्तर में वृद्धि की यह गति जारी रही, तो अगले 24 घंटों में नदी चेतावनी बिंदु को पार कर जाएगी।
प्रमुख घाटों की स्थिति: आस्था के केंद्रों पर बाढ़ का साया
- मणिकर्णिका घाट पर छतों पर शवदाह: महाश्मशान मणिकर्णिका घाट चारों ओर से बाढ़ के पानी में घिर गया है। शवयात्रियों को नाव के जरिए छतों तक पहुंचना पड़ रहा है, जहां अंतिम संस्कार संपन्न कराया जा रहा है। सीमित स्थान होने के कारण लोगों को 3 घंटे तक इंतजार करना पड़ रहा है।
- दशाश्वमेध घाट और जल पुलिस थाना: जल पुलिस चौकी में पानी भरने के बाद पुलिसकर्मियों को खुले आसमान और पेड़ों की छांव में अस्थाई व्यवस्था करनी पड़ी है। सुरक्षा के मद्देनजर 16 अगस्त से ही नौका संचालन पूरी तरह बंद है। सुप्रसिद्ध गंगा आरती पिछले 15 दिनों से छतों पर प्रतीकात्मक रूप से की जा रही है, जिसमें श्रद्धालुओं की संख्या घटाकर अधिकतम 50 कर दी गई है।
- नमो घाट व फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन: नमो घाट पर स्थापित ‘नमस्ते’ स्कल्पचर का आधा हिस्सा जलमग्न हो चुका है। भारत का पहला फ्लोटिंग सीएनजी स्टेशन जलस्तर बढ़ने के कारण अपनी मूल स्थिति से लगभग 30 फीट ऊपर आ चुका है।
- अस्सी घाट: पूरा घाट परिसर जलमग्न हो चुका है। पूजा-अर्चना और आरती के आयोजनों को घाट के पीछे की गलियों में सीमित रूप में स्थानांतरित करने की तैयारी चल रही है।
वरुणा नदी भी उफान पर, 10 हजार से अधिक लोग प्रभावित
गंगा में आए बैकवाटर के कारण सहायक वरुणा नदी भी किनारों को तोड़कर बाहर बहने लगी है। तटीय इलाकों के दर्जनों मोहल्ले बाढ़ के पानी से घिरने की कगार पर हैं।
वर्तमान में घाट किनारे रहने वाले लगभग 10,000 लोग (मुख्यतः नाविक और दैनिक कामगार) सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। जलस्तर में और बढ़ोतरी होने पर प्रभावितों की संख्या 25,000 पार करने की आशंका है, जिसके लिए प्रशासन राहत शिविरों को सक्रिय करने की तैयारी में जुटा है।
