काशीपुराधिपति के तिलकोत्सव में बड़ी शीतलाधाम बनेगा ‘साक्षी’, बसंत पंचमी से गूंजेंगे मंगल गीत, ऋतुराज के आगमन के साथ महादेव के विवाह की आहट
वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी, जहाँ कण-कण में शंकर और क्षण-क्षण में उत्सव बसता है, एक बार फिर एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। इस …
वाराणसी। देवाधिदेव महादेव की नगरी काशी, जहाँ कण-कण में शंकर और क्षण-क्षण में उत्सव बसता है, एक बार फिर एक ऐतिहासिक और भावुक क्षण की साक्षी बनने जा रही है। इस वर्ष बसंत पंचमी का पर्व काशीवासियों के लिए अत्यंत विशेष होने वाला है क्योंकि सदियों पुरानी ‘तिलकोत्सव’ की परंपरा में पहली बार सिद्धपीठ बड़ी शीतला माता मंदिर (दशाश्वमेध) के महंत परिवार को बाबा विश्वनाथ का ‘सगुन’ लेकर आने का सौभाग्य प्राप्त हुआ है।
यह आयोजन केवल एक धार्मिक अनुष्ठान मात्र नहीं है, बल्कि काशी की उस अनूठी लोक-संस्कृति का परिचायक है जहाँ ईश्वर को एक शासक की तरह नहीं, बल्कि परिवार के मुखिया और लाड़ले ‘वर’ (दूल्हे) के रूप में पूजा जाता है।
काशी की मान्यताओं के अनुसार, बसंत पंचमी केवल प्रकृति के सौंदर्य का उत्सव नहीं है, बल्कि यह बाबा विश्वनाथ के विवाहोत्सव का बिगुल है। इसी दिन से काशी में बाबा के विवाह की रस्में शुरू हो जाती हैं, जो महाशिवरात्रि से होते हुए रंगभरी एकादशी (माता गौरा का गौना) तक अनवरत चलती हैं। लोकपरंपरा के अनुसार, बसंत पंचमी पर बाबा की ‘पंचबदन चल प्रतिमा‘ का तिलकोत्सव किया जाता है, जिसमें पूरी काशी उनके ससुराल पक्ष की भूमिका निभाती है।
बड़ी शीतलाधाम से निकलेगी भव्य तिलक यात्रा
इस गौरवमयी आयोजन की कमान इस वर्ष बड़ी शीतला माता मंदिर के कंधों पर है। उपमहंत अवशेष पाण्डेय (कल्लू महाराज) ने हर्ष व्यक्त करते हुए बताया कि प्रत्येक वर्ष काशी का कोई न कोई प्रतिष्ठित परिवार बाबा के तिलक की जिम्मेदारी उठाता है। इस वर्ष यह शुभ अवसर उनके परिवार को मिला है।
तैयारियों के क्रम में, गुरुवार को ही समस्त पूजन सामग्री और तिलक का उपहार बड़ी शीतला माता मंदिर से बांसफाटक स्थित ‘श्रीयंत्र पीठम‘ (धर्म निवास परिसर) भेज दिया जाएगा। शुक्रवार की संध्या, शुभ मुहूर्त में श्रीयंत्र पीठम से एक भव्य शोभायात्रा निकलेगी। इस यात्रा का नेतृत्व स्वयं श्रीमहंत शिवप्रसाद पाण्डेय ‘लिंगिया महाराज’ करेंगे। पारंपरिक वाद्य यंत्रों, डमरू दल और वैदिक मंत्रोच्चार के बीच यह जुलूस टेढ़ीनीम स्थित पूर्व महंत आवास पहुंचेगा।
वैदिक अनुष्ठान और अलौकिक श्रृंगार
टेढ़ीनीम स्थित महंत आवास पर इस उत्सव की छटा निराली होगी। शिवांजलि के संयोजक संजीव रत्न मिश्र के अनुसार, परिवार की वरिष्ठ सदस्या श्रीमती मोहिनी देवी के सान्निध्य में पूरा आयोजन संपन्न होगा।
- विशेष पूजन: सुप्रसिद्ध अंकशास्त्री महंत वाचस्पति तिवारी के नेतृत्व में 11 प्रकांड वैदिक ब्राह्मण बाबा की पंचबदन प्रतिमा का अभिषेक करेंगे।
- भव्य श्रृंगार: पूजन के पश्चात बाबा का ऐसा मनमोहक श्रृंगार किया जाएगा जो काशी की प्राचीन धार्मिक शैली को जीवंत कर देगा।
- समय: यह सम्पूर्ण प्रक्रिया सायंकाल सप्तर्षि आरती से ठीक पहले पूरी की जाएगी, ताकि नियत समय पर बाबा को तिलक चढ़ाया जा सके।
भक्त और भगवान के बीच का ‘पारिवारिक‘ बंधन
काशी की इस परंपरा की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ भक्त और भगवान के बीच कोई औपचारिक दूरी नहीं होती। बाबा को तिलक चढ़ाने का भाव यह है कि काशीवासी अपने इष्ट को विवाह के लिए आमंत्रित कर रहे हैं। यह लोकाचार सदियों से काशी की आत्मा में बसा है।
रंगभरी एकादशी तक उत्सवों का महासंगम
बसंत पंचमी को शुरू हुआ यह मंगल कार्य आगामी हफ्तों तक काशी की गलियों में उत्सव का रंग घोलेगा। महाशिवरात्रि पर बाबा का विवाह होगा और फागुनोत्सव के साथ खुशियाँ मनाई जाएंगी। इस पूरी श्रृंखला का समापन रंगभरी एकादशी को होगा, जब बाबा अपनी अर्धांगिनी माता गौरा का गौना कराकर उन्हें काशी विश्वनाथ मंदिर ले जाएंगे।
वर्तमान में काशी के हर कोने में इसी तिलकोत्सव की चर्चा है और श्रद्धालु उस पल की प्रतीक्षा कर रहे हैं जब बड़ी शीतलाधाम के आँगन से बाबा विश्वनाथ का तिलक टेढ़ीनीम की ओर प्रस्थान करेगा।
