वाराणसी। अयोध्या के राम मंदिर में सामने आए कथित दान चोरी के मामले को लेकर धार्मिक नगरी काशी में संतों में गहरा आक्रोश है। इस गंभीर विषय पर मंगलवार शाम संतों ने सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य स्वामी नरेंद्रानंद सरस्वती की अध्यक्षता में एक अहम बैठक की। बैठक में संतों ने एक सुर में कहा कि प्रभु श्रीराम के मंदिर में इस तरह की कृत्य ने देश-विदेश के करोड़ों रामभक्तों की आस्था को ठेस पहुंचाई है। संतों ने मांग की कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एक ठोस और स्थायी व्यवस्था बनाई जाए और मंदिरों को सरकारी नियंत्रण से पूरी तरह मुक्त किया जाए।
आस्था के केंद्र में ऐसी लापरवाही निंदनीय: शंकराचार्य
बैठक के दौरान सुमेरू पीठाधीश्वर शंकराचार्य नरेंद्रानंद सरस्वती ने इस पूरे घटनाक्रम पर गहरी चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अयोध्या अनादि काल से करोड़ों सनातनियों की श्रद्धा और भक्ति का सर्वोच्च केंद्र है। दानपेटी से चोरी का यह मामला बेहद संवेदनशील है।
जांच और कार्रवाई पर नजर: शंकराचार्य ने कहा कि पुलिस प्रशासन द्वारा कुछ आरोपियों को गिरफ्तार किए जाने और सरकार द्वारा निष्पक्ष जांच के भरोसे का वे स्वागत करते हैं, लेकिन दोषियों को ऐसी सजा मिलनी चाहिए जो नजीर बने। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यह गड़बड़ी कई महीनों से चल रही थी और जिम्मेदार अधिकारी सोते रहे, तो यह गंभीर प्रशासनिक लापरवाही है।
सरकारी तंत्र के बजाय स्वतंत्र बोर्ड के हाथों में हो कमान
मंदिरों के प्रबंधन को लेकर चल रही देशव्यापी बहस पर शंकराचार्य ने एक बड़ा सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि केवल पुलिस बल बढ़ा देने या सुरक्षा कड़ी करने से ऐसी चोरियां नहीं रुकेंगी। इसके लिए तकनीकी निगरानी, पारदर्शिता और नियमित ऑडिट जरूरी है।
- स्वतंत्र बोर्ड का गठन: मंदिरों का संचालन सरकारी अधिकारियों के बजाय संत समाज, समर्पित श्रद्धालुओं, प्रबुद्ध वर्ग और प्रतिष्ठित नागरिकों की भागीदारी वाले एक स्वतंत्र बोर्ड (Independent Board) के माध्यम से होना चाहिए। इससे व्यवस्था में जवाबदेही तय होगी और जनविश्वास बहाल होगा।
मंदिर के धन से चलें गुरुकुल और गौशालाएं
शंकराचार्य ने देश के अन्य बेहतर प्रबंधित मंदिरों का उदाहरण देते हुए कहा कि धार्मिक स्थलों पर आने वाले चढ़ावे का सदुपयोग समाजहित में होना चाहिए। श्रद्धालुओं द्वारा श्रद्धापूर्वक दान किए गए धन का उपयोग निम्नलिखित कार्यों में प्राथमिकता के आधार पर किया जाना चाहिए:
- प्राचीन गुरुकुलों की स्थापना और संचालन में।
- बेसहारा गायों के लिए आधुनिक गौशालाओं के रख-रखाव में।
- निर्धन छात्रों की उच्च शिक्षा और सनातन संस्कृति के संरक्षण में।
- तीर्थयात्रियों के लिए बेहतर और आधुनिक सुविधाएं विकसित करने में।
