वाराणसी। विश्व की सबसे प्राचीन जीवित सभ्यताओं में शामिल काशी ने एक बार फिर अपनी आध्यात्मिक और वैज्ञानिक विरासत को आधुनिक युग से जोड़ने की दिशा में ऐतिहासिक पहल की है। श्री काशी विश्वनाथ धाम के भव्य मंदिर चौक में स्थापित विक्रमादित्य वैदिक घड़ी ने रविवार को ब्रह्म मुहूर्त से समय बताना शुरू कर दिया। इस घड़ी के संचालन के साथ ही काशी में एक बार फिर पारंपरिक भारतीय कालगणना प्रणाली जीवंत हो उठी है।
यह घड़ी भारतीय समय गणना पर आधारित विश्व की दूसरी वैदिक घड़ी है। इससे पहले ऐसी घड़ी मध्य प्रदेश के उज्जैन में स्थापित की जा चुकी है। अब काशी में इसकी स्थापना को सनातन ज्ञान और वैज्ञानिक परंपरा के पुनरुत्थान के रूप में देखा जा रहा है।
उज्जैन के ‘महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ’ की अनूठी पहल
इस वैदिक घड़ी को उज्जैन स्थित महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ द्वारा विकसित किया गया है। यह केवल एक घड़ी नहीं, बल्कि भारतीय खगोल विज्ञान, गणित और समय मापन की हजारों वर्ष पुरानी परंपरा का आधुनिक रूपांतरण है।
इसकी सबसे खास बात यह है कि यह घड़ी पूरी तरह सूर्योदय आधारित प्रणाली पर कार्य करती है। यानी समय का निर्धारण किसी तय घड़ी या GMT से नहीं, बल्कि उस स्थान के वास्तविक सूर्योदय और सूर्यास्त के आधार पर होता है। इस कारण यह घड़ी प्रकृति के साथ तालमेल बनाकर समय की गणना करती है, जो इसे पारंपरिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टियों से विशेष बनाती है।
30 मुहूर्तों में बंटा पूरा दिन, समय की सटीक वैदिक गणना
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी की सबसे प्रमुख विशेषता इसकी समय विभाजन प्रणाली है। इसमें एक दिन को सूर्योदय से अगले सूर्योदय तक की अवधि में मापा जाता है और इसे 30 मुहूर्तों में विभाजित किया जाता है।
- सूर्योदय से सूर्यास्त तक — 15 मुहूर्त
- सूर्यास्त से अगले सूर्योदय तक — 15 मुहूर्त
- प्रत्येक मुहूर्त की अवधि — लगभग 48 मिनट
इसके अलावा, समय को और सूक्ष्म रूप से विभाजित करते हुए—
- 1 दिन = 900 कला
- 1 दिन = 27,000 काष्ठा
जहां एक कला लगभग 96 सेकंड और एक काष्ठा लगभग 3.2 सेकंड के बराबर होती है। यह प्रणाली दर्शाती है कि प्राचीन भारत में समय की गणना कितनी सूक्ष्म और वैज्ञानिक ढंग से की जाती थी।

एक ही घड़ी में पंचांग से ग्रहों तक की पूरी जानकारी
यह वैदिक घड़ी केवल समय बताने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक संपूर्ण “डिजिटल पंचांग” की तरह कार्य करती है। इसके माध्यम से उपयोगकर्ता निम्नलिखित जानकारियां एक ही स्थान पर प्राप्त कर सकते हैं:
- तिथि, वार और नक्षत्र
- योग और करण
- भद्रा की स्थिति
- ग्रहों का गोचर और चंद्रमा की चाल
- विक्रम संवत और भारतीय पंचांग
- स्थानीय सूर्योदय और सूर्यास्त का समय
इस प्रकार यह घड़ी धार्मिक, सांस्कृतिक और ज्योतिषीय सभी दृष्टियों से अत्यंत उपयोगी साबित होती है।
सनातन विज्ञान और आधुनिक तकनीक का अद्भुत संगम
विशेषज्ञों के अनुसार, यह वैदिक घड़ी सनातन परंपरा और आधुनिक तकनीक के संगम का उत्कृष्ट उदाहरण है। जहां आज की स्मार्ट वॉच केवल डिजिटल समय और फिटनेस डेटा तक सीमित हैं, वहीं यह वैदिक घड़ी समय के साथ-साथ सांस्कृतिक और वैज्ञानिक जानकारी भी प्रदान करती है।
इस घड़ी को भारतीय स्टैंडर्ड टाइम के साथ भी समन्वित किया गया है, जिससे पारंपरिक और आधुनिक समय प्रणाली के बीच संतुलन बना रहता है।
मुख्यमंत्रियों की मौजूदगी में हुआ ऐतिहासिक समर्पण
इस घड़ी का समर्पण 3 अप्रैल को विशेष समारोह के दौरान किया गया। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इसे उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को श्री काशी विश्वनाथ मंदिर परिसर में अर्पित किया।
मंदिर के मुख्य कार्यपालक अधिकारी विश्व भूषण मिश्र ने बताया कि घड़ी को मंदिर चौक में स्थापित किया गया है और इसके रखरखाव, संचालन और मरम्मत की जिम्मेदारी न्यास परिषद द्वारा निभाई जाएगी।
युवाओं के लिए भारतीय कालगणना को समझने का माध्यम
काशी विद्वत परिषद के महामंत्री और बीएचयू के संस्कृत विद्या धर्म विज्ञान संकाय के प्रो. रामनारायण द्विवेदी के अनुसार, इस घड़ी के निर्माण में काशी के विद्वानों का मार्गदर्शन भी शामिल रहा है।
उन्होंने बताया कि यह घड़ी नई पीढ़ी को भारतीय समय चक्र, पंचांग और खगोल विज्ञान को समझने में मदद करेगी। इससे युवाओं में अपनी परंपरा के प्रति जागरूकता बढ़ेगी और वे वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भारतीय ज्ञान प्रणाली को समझ सकेंगे।
मोबाइल ऐप से घर-घर पहुंचेगा वैदिक समय
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के साथ एक आधुनिक मोबाइल ऐप भी विकसित किया गया है, जिससे यह ज्ञान केवल मंदिर परिसर तक सीमित न रहकर आम लोगों तक पहुंच सके।
इस ऐप की प्रमुख विशेषताएं हैं:
- 30 घंटे आधारित वैदिक समय प्रणाली
- 5800 वर्षों तक का विस्तृत पंचांग
- मुहूर्त आधारित अलार्म और शुभ-अशुभ संकेत
- लाइव मौसम, तापमान और आर्द्रता की जानकारी
- लोकेशन आधारित समय निर्धारण
- 180 से अधिक भाषाओं में उपलब्धता
सनातन परंपरा के वैश्विक प्रसार की दिशा में बड़ा कदम
काशी में वैदिक घड़ी की स्थापना केवल एक तकनीकी या धार्मिक पहल नहीं, बल्कि यह भारत की प्राचीन वैज्ञानिक विरासत को वैश्विक मंच पर प्रस्तुत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
यह घड़ी यह संदेश देती है कि भारत की पारंपरिक ज्ञान प्रणाली न केवल अतीत की धरोहर है, बल्कि आज भी उतनी ही प्रासंगिक और वैज्ञानिक है। आने वाले समय में यह पहल विश्व को भारतीय कालगणना और सनातन विज्ञान की गहराई से परिचित कराने में अहम भूमिका निभा सकती है।
