वाराणसी। नाना पाटेकर और काशी का रिश्ता सिर्फ कैमरे, फिल्मी पर्दे और शूटिंग लोकेशन तक सीमित नहीं था। बनारस में उनके आने की कई ऐसी यादें हैं, जिनमें कभी गांव का एक युवक उनकी जिंदगी का हिस्सा बना तो कभी घाटों की मस्ती, काशी की आत्मीयता और यहां के लोगों के बीच उनका सहज अंदाज चर्चा में रहा।
नाना पाटेकर वर्ष 2000 में फिल्म ‘आंच’ की शूटिंग के लिए वाराणसी आए थे। इसके बाद नवंबर 2023 में ‘जर्नी’ की शूटिंग और दिसंबर 2024 में फिल्म ‘वनवास’ के प्रमोशन तथा जागरण फिल्म फेस्टिवल के सिलसिले में उनकी काशी यात्रा दर्ज है। बाद में जर्नी का नाम ही बदलकर वनवास रख दिया गया।
2000: ‘आंच’ की शूटिंग और संतोष से मुलाकात
नाना पाटेकर की काशी से जुड़ी सबसे चर्चित पुरानी याद वर्ष 2000 की है। उनकी फिल्म ‘आंच’ की शूटिंग वाराणसी के चौबेपुर क्षेत्र के छितौनी गांव में हुई थी। शूटिंग के दौरान उनकी मुलाकात गांव के संतोष मूरत सिंह से हुई। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार नाना संतोष से प्रभावित हुए और उन्हें अपने साथ मुंबई ले गए, जहां संतोष ने उनके घर पर रसोइए के तौर पर काम किया।
आगे चलकर संतोष की जिंदगी में बड़ा विवाद खड़ा हुआ। उनकी अनुपस्थिति के दौरान परिजनों ने उनकी मौत की अफवाह फैलाकर जमीन अपने नाम करा ली। इसके बाद संतोष को सरकारी दस्तावेजों में खुद को जीवित साबित करने की लंबी लड़ाई लड़नी पड़ी। इस पूरे प्रकरण में नाना पाटेकर से जुड़ी वह पुरानी मुलाकात भी बार-बार सामने आती रही।
2023: 35 साल बाद लौटे बनारस
नवंबर 2023 में नाना पाटेकर फिल्म ‘जर्नी’ की शूटिंग के लिए वाराणसी पहुंचे। उस दौरान उन्होंने कहा था कि वह करीब 35 साल बाद बनारस आए हैं और पिछली यात्रा में उन्हें शहर घूमने का मौका मिला था। उन्होंने यह भी कहा कि शूटिंग पूरी होने के बाद वे काशी को फिर से करीब से देखना चाहते हैं।
‘जर्नी’ की शूटिंग अस्सी घाट समेत काशी के कई इलाकों में हुई। अस्सी घाट पर रामधुन, डमरू और मंजीरे के बीच फिल्म का मुहूर्त हुआ। नाना पाटेकर ने कलाकारों के साथ शूटिंग में हिस्सा लिया।
इसी शूटिंग के दौरान दशाश्वमेध घाट के पास सेल्फी लेने पहुंचे एक युवक को थप्पड़ मारने का वीडियो वायरल हुआ था। बाद में नाना ने सफाई देते हुए माफी मांगी और बताया कि उन्हें लगा था कि युवक फिल्म के सीन का हिस्सा है।
लेकिन इस विवाद के साथ काशी की उनकी दूसरी तस्वीर भी सामने आई। 19 नवंबर 2023 को उन्होंने मंडुवाडीह स्थित एक अपार्टमेंट में लोगों के साथ क्रिकेट विश्व कप का फाइनल देखा। वहां उन्होंने काशीवासियों की आत्मीयता की तारीफ करते हुए काशी के सम्मोहन को अद्वितीय बताया।
2024: ‘वनवास’ के साथ फिर काशी
दिसंबर 2024 में नाना पाटेकर एक बार फिर वाराणसी पहुंचे। इस बार मौका फिल्म ‘वनवास’ के प्रमोशन का था। उनके साथ उत्कर्ष शर्मा और सिमरत कौर भी थीं। इस दौरान उन्होंने काशी के बदलते स्वरूप की सराहना की और नमो घाट, अस्सी घाट तथा काशी विश्वनाथ मंदिर का जिक्र करते हुए बनारस से अपने लगाव की बात कही।
इसी दौर में वाराणसी जागरण फिल्म फेस्टिवल में नाना ने युवाओं से संवाद किया। उन्होंने कहा कि फिल्मों में केवल शोहरत और पैसा कमाने के लिए आने के बजाय समाज को कुछ देने की इच्छा भी होनी चाहिए। उन्होंने सीआरपीएफ जवानों से भी मुलाकात की और उन्हें देश का गौरव बताया।
काशी में छूट गईं नाना की यादें
नाना पाटेकर की काशी यात्राओं को देखें तो तस्वीर किसी एक फिल्म अभिनेता की नहीं, बल्कि ऐसे कलाकार की बनती है जो हर बार बनारस के किसी अलग रंग से जुड़ता दिखाई दिया। वर्ष 2000 में एक गांव के युवक से मुलाकात ने उनकी जिंदगी की एक अलग कहानी रची। 2023 में घाटों और गलियों के बीच ‘जर्नी’ की शूटिंग हुई और 2024 में वे युवाओं तथा फिल्म प्रेमियों के बीच पहुंचे।
काशी ने नाना को कई चेहरे दिए और नाना ने भी अपने संस्मरणों में बनारस को जगह दी। यही वजह है कि उनके जाने के बाद काशी में उनकी यादें केवल फिल्मों के दृश्यों में नहीं, बल्कि उन लोगों की बातों में भी जीवित रहेंगी, जिनसे उनका कभी न कभी सामना हुआ था।
