वाराणसी। काशी की पावन धरा पर तीन दिवसीय ‘सम्राट विक्रमादित्य महोत्सव’ का भव्य आगाज हुआ, जिसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। बीएलडब्ल्यू स्थित सूर्य सरोवर मैदान में आयोजित इस कार्यक्रम ने वाराणसी को मानो प्राचीन भारत के स्वर्णिम युग में पहुंचा दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत महाकाल की भस्म आरती, वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्वलन के साथ हुई। जैसे ही दोनों मुख्यमंत्रियों ने दीप जलाया, पूरा परिसर “भारत माता की जय” और “सम्राट विक्रमादित्य अमर रहें” के जयघोष से गूंज उठा। इस दौरान मंच पर हाथी-घोड़ों की गूंज, रथों की रफ्तार और शौर्य गाथाओं ने दर्शकों को रोमांचित कर दिया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि यह आयोजन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक भारत-श्रेष्ठ भारत’ की अवधारणा को साकार करता है। उन्होंने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत अत्यंत समृद्ध है और सम्राट विक्रमादित्य केवल एक शासक नहीं, बल्कि न्याय, धर्म और लोककल्याण के प्रतीक थे। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का कार्य करते हैं।
वहीं, मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि सम्राट विक्रमादित्य भारतीय इतिहास के महान शासकों में से एक थे, जिनकी कीर्ति आज भी जनमानस में जीवित है। उन्होंने काशी और उज्जैन के सांस्कृतिक संबंधों का उल्लेख करते हुए कहा कि दोनों राज्यों की सरकारें मिलकर पर्यटन और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए काम कर रही हैं।
तीन मंचों पर सजी ऐतिहासिक गाथा
इस भव्य महानाट्य की सबसे बड़ी विशेषता इसका अद्वितीय मंचन रहा। एक साथ तीन विशाल मंचों पर समांतर रूप से सम्राट विक्रमादित्य के जीवन के विभिन्न प्रसंगों को प्रस्तुत किया गया। 225 से अधिक कलाकारों ने अभिनय, संवाद और जीवंत अभिव्यक्ति के जरिए पूरे कार्यक्रम को वास्तविक इतिहास जैसा बना दिया।

मंचन में 18 घोड़े, 2 रथ, 4 ऊंट, 1 हाथी और पालकी का उपयोग किया गया, जिससे युद्ध दृश्य और शाही वैभव सजीव नजर आया। विक्रम-बेताल की कथा, राजतिलक, न्याय और धर्म की कहानियां दर्शकों के सामने जीवंत हो उठीं।
तकनीक और परंपरा का अनूठा संगम
कार्यक्रम में हाई-टेक लाइटिंग, डिजिटल साउंड इफेक्ट्स, एलईडी बैकड्रॉप और स्मोक इफेक्ट्स का प्रभावी इस्तेमाल किया गया। परंपरा और आधुनिक तकनीक के इस संगम ने दर्शकों को एक अलग ही अनुभव दिया।

हजारों की संख्या में पहुंचे दर्शकों ने इस आयोजन को “लाइव इतिहास की किताब” बताया, जहां उन्होंने अपने पढ़े हुए इतिहास को आंखों के सामने साकार होते देखा। बच्चों और युवाओं के लिए यह कार्यक्रम विशेष रूप से प्रेरणादायक साबित हुआ।
इस अवसर पर मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी भेंट की, जिसे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में स्थापित किया जाएगा।
यह महोत्सव न केवल एक सांस्कृतिक आयोजन है, बल्कि भारतीय इतिहास, परंपरा और आदर्श शासन प्रणाली को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम भी है।
