बुलंदशहर। सफलता संसाधनों की नहीं, बल्कि मेहनत और दृढ़ संकल्प की मोहताज होती है—इसे बुलंदशहर की गायत्री वर्मा ने सच कर दिखाया है। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (UPPSC) परीक्षा में 210वीं रैंक हासिल कर उन्होंने न सिर्फ अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि संघर्ष कर रहे युवाओं के लिए प्रेरणा बन गईं।
पिता की मेहनत बनी प्रेरणा
गायत्री के पिता राजकुमार वर्मा शिकारपुर रोड पर एक छोटी दुकान चलाते हैं, जहां वे टायर पंक्चर बनाने के साथ चाय भी बेचते हैं। सीमित आय के बावजूद उन्होंने अपनी बेटी की पढ़ाई में कोई कमी नहीं आने दी। कई बार फीस भरने के लिए उन्हें कर्ज तक लेना पड़ा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
दो असफलताओं के बाद मिली सफलता
गायत्री की यह सफलता उनके तीसरे प्रयास का परिणाम है। पहले प्रयास में वह प्रारंभिक परीक्षा भी पास नहीं कर सकीं, जबकि दूसरे प्रयास में मुख्य परीक्षा तक पहुंचकर अंतिम चयन से चूक गईं। अपनी गलतियों से सीखते हुए उन्होंने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर ली।
डिजिटल माध्यम से की तैयारी
आर्थिक तंगी के चलते गायत्री महंगी कोचिंग का सहारा नहीं ले सकीं। उन्होंने ऑनलाइन प्लेटफॉर्म और डिजिटल नोट्स के जरिए अपनी तैयारी पूरी की। तैयारी के दौरान उन्होंने सोशल मीडिया से दूरी बनाकर पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित किया। इंटरमीडिएट के बाद वे अलीगढ़ में अपने ननिहाल में रहकर पढ़ाई करती रहीं।
पिता बोले—मेहनत जारी रहेगी
बेटी के अफसर बनने के बाद भी पिता ने अपने काम को जारी रखने का फैसला किया है। उनका कहना है कि वे अपनी जिम्मेदारी निभाते रहेंगे और अपने अन्य बच्चों को भी इसी मेहनत के दम पर आगे बढ़ाएंगे। उन्होंने बेटी से ईमानदारी के साथ समाज की सेवा करने की उम्मीद जताई।
युवाओं के लिए बनी मिसाल
गायत्री वर्मा की यह सफलता उन युवाओं के लिए प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के कारण अपने सपनों को छोड़ देते हैं। उनका सफर बताता है कि अगर लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी बाधा सफलता की राह नहीं रोक सकती।
