• Banaras Now, Varanasi
  • March 6, 2026

लखनऊ। भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत जारी टैरिफ ज्वाइंट स्टेटमेंट को उत्तर प्रदेश की निर्यात आधारित अर्थव्यवस्था के लिए एक अहम नीतिगत संकेत माना जा रहा है। इस समझौते में भारतीय उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ को औसतन 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत करने और चुनिंदा श्रेणियों में शून्य शुल्क लागू करने का प्रावधान किया गया है।

विशेषज्ञों के अनुसार, इस टैरिफ व्यवस्था का लाभ उत्तर प्रदेश के श्रम-प्रधान उद्योगों, एमएसएमई और क्लस्टर आधारित उत्पादन इकाइयों को मिलेगा। भदोही-मिर्जापुर कार्पेट बेल्ट, वाराणसी सिल्क सेक्टर, कानपुर-आगरा लेदर क्लस्टर, पश्चिमी यूपी के होम डेकोर उद्योग और राज्य के कृषि-आधारित निर्यात क्षेत्रों के लिए यह समझौता दीर्घकालिक अवसर लेकर आ सकता है।

टेक्सटाइल और कार्पेट सेक्टर को बढ़त

ज्वाइंट स्टेटमेंट के तहत टेक्सटाइल और अपैरल उत्पादों पर अमेरिकी टैरिफ में बड़ी कटौती तथा रेशम आधारित उत्पादों को शून्य शुल्क के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया गया है। इससे भदोही-मिर्जापुर के हस्तनिर्मित कालीन और वाराणसी के सिल्क उत्पादों को अमेरिकी बाजार में बेहतर प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मिलने की संभावना है। साथ ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के पावरलूम और रेडीमेड गारमेंट उद्योग को भी वैश्विक बाजार में नई पहुंच मिल सकती है।

लेदर और फुटवियर क्लस्टर्स को राहत

कानपुर और आगरा के लेदर व फुटवियर उद्योग लंबे समय से ऊंचे टैरिफ के कारण लागत दबाव झेल रहे थे। प्रस्तावित कटौती से इन क्लस्टर्स की निर्यात लागत घटने और अमेरिकी खरीदारों के साथ दीर्घकालिक आपूर्ति अनुबंधों की संभावनाएं बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे एमएसएमई इकाइयों को सीधे निर्यात का अवसर भी मिल सकता है।

होम डेकोर और कारीगर आधारित उद्योग

मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद, बुलंदशहर और गौतमबुद्ध नगर जैसे क्षेत्रों में सक्रिय होम डेकोर और हस्तशिल्प उद्योग को भी टैरिफ राहत से लाभ मिलने की संभावना है। शुल्क घटने से छोटे उत्पादकों और कारीगरों की अमेरिकी बाजार तक सीधी पहुंच आसान हो सकती है, जिससे स्थानीय स्तर पर मूल्यवर्धन और रोजगार सृजन को बल मिलेगा।

कृषि और प्रोसेस्ड फूड को नया आधार

कृषि और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों पर शून्य शुल्क का प्रस्ताव उत्तर प्रदेश की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। आम, सब्जियां, मसाले और प्रोसेस्ड फूड उत्पादों के निर्यात से जुड़े फूड प्रोसेसिंग क्लस्टर्स, मेगा फूड पार्क और एफपीओ को इससे सीधा लाभ मिल सकता है।

फार्मा, मशीनरी और हाई-टेक सेक्टर को समर्थन

फार्मा, मशीनरी और ऑटो कंपोनेंट्स पर न्यूनतम या शून्य शुल्क की व्यवस्था से नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और लखनऊ जैसे औद्योगिक क्षेत्रों को वैश्विक सप्लाई चेन से जोड़ने में मदद मिल सकती है। साथ ही डेटा सेंटर, सेमीकंडक्टर और डिजिटल इन्फ्रास्ट्रक्चर से जुड़े निवेश को भी प्रोत्साहन मिलने की संभावना है।

संवेदनशील क्षेत्रों में संतुलन बरकरार

ज्वाइंट स्टेटमेंट में डेयरी, अनाज, पोल्ट्री और जीएम फूड जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में घरेलू हितों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। आयात उदारीकरण को चरणबद्ध और संतुलित रखने की बात कही गई है, ताकि किसानों और ग्रामीण आजीविका पर प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि यह टैरिफ समझौता उत्तर प्रदेश के लिए निर्यात, निवेश और रोजगार सृजन के लिहाज से दीर्घकालिक संरचनात्मक अवसर प्रदान कर सकता है, बशर्ते राज्य स्तर पर लॉजिस्टिक्स, गुणवत्ता मानक और क्लस्टर आधारित नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

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