वाराणसी: गंगा नदी के बीच नाव पर आयोजित इफ्तार पार्टी और नाविक के कथित अपहरण के मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए सभी 14 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट के आदेश के बाद आरोपियों को फिर से जेल भेज दिया गया।
जिला जज कोर्ट में लंबी सुनवाई के बाद फैसला
मामले की सुनवाई जिला जज की अदालत में हुई, जहां सुबह से दोपहर तक दोनों पक्षों के वकीलों के बीच तीखी बहस चली। सेशन जज आलोक कुमार ने सभी पक्षों को सुनने के बाद विस्तृत आदेश जारी करते हुए जमानत याचिका नामंजूर कर दी। फैसला आने के बाद अदालत परिसर में आरोपियों के परिजन भावुक दिखे, जबकि आरोपी शांत रहे।
कोर्ट ने माना—पूर्व नियोजित घटना
वादी पक्ष के अधिवक्ता नित्यानंद राय के अनुसार अदालत ने इस घटना को सुनियोजित माना है। कोर्ट ने कहा कि जिस समय यह घटना हुई, उस दौरान घाटों पर गंगा आरती और धार्मिक गतिविधियां चल रही थीं। ऐसे संवेदनशील माहौल में नदी के बीच इस तरह की गतिविधि को गंभीर अपराध की श्रेणी में रखा गया।
क्या था पूरा मामला
घटना 16 मार्च की है, जब गंगा नदी के बीच नाव पर इफ्तार पार्टी आयोजित की गई थी। इसमें रोजेदारों को फल और मेवों के साथ चिकन बिरयानी भी परोसी गई थी। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद बढ़ गया और कई संगठनों ने आपत्ति जताई।
8 घंटे में पुलिस की कार्रवाई
शिकायत मिलते ही पुलिस ने तेजी दिखाते हुए महज 8 घंटे के भीतर 14 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया था। सभी आरोपी वाराणसी के मदनपुरा क्षेत्र के ताड़तल्ला इलाके के रहने वाले बताए गए हैं, जिनकी उम्र 19 से 25 वर्ष के बीच है और अधिकांश आपस में जुड़े हुए हैं।
पहले भी नहीं मिली थी राहत
इससे पहले आरोपियों की जमानत अर्जी सीजेएम कोर्ट से भी खारिज हो चुकी थी। अब जिला जज कोर्ट से भी राहत नहीं मिलने के बाद सभी आरोपियों को जेल में ही रहना होगा।
प्रशासन का कहना है कि वाराणसी जैसे धार्मिक दृष्टि से संवेदनशील शहर में इस तरह की घटनाओं को गंभीरता से लिया जाएगा और कानून व्यवस्था से किसी तरह का समझौता नहीं किया जाएगा।
