भोपाल। प्रसिद्ध संत और हनुमान भक्त नीम करोली बाबा से जुड़ी एक खास आध्यात्मिक धरोहर मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में पिछले 53 वर्षों से सुरक्षित रखी गई है। बाबा का अस्थि कलश उनके परिवार के पास पूरी श्रद्धा और सम्मान के साथ संरक्षित है।
जानकारी के मुताबिक, नीम करोली बाबा ने 11 सितंबर 1973 को वृंदावन में अनंत चतुर्दशी के अवसर पर देह त्याग किया था। इसके बाद उनकी अस्थियों का विसर्जन देश की 11 पवित्र नदियों में किया गया, लेकिन एक भाग उनके बड़े पुत्र अपने साथ भोपाल ले आए, जिसे आज तक संभालकर रखा गया है।
भोपाल से रहा गहरा जुड़ाव
बाबा के पोते डॉ. धनंजय शर्मा ने बताया कि नीम करोली बाबा का भोपाल से विशेष संबंध रहा है। वर्ष 1970 में वे लगभग 10 दिनों तक अरेरा कॉलोनी स्थित उनके निवास पर रहे थे। इस दौरान उन्होंने शहर के विभिन्न स्थानों का दौरा किया और नेवरी मंदिर में भी समय बिताया।
आस्था का प्रतीक बना अस्थि कलश
परिवार के अनुसार, यह अस्थि कलश उनके लिए अत्यंत पवित्र और आस्था का केंद्र है। वे नीम करोली बाबा को हनुमान जी का स्वरूप मानते हैं, इसलिए इस धरोहर की विशेष पूजा-अर्चना की जाती है।
डॉ. शर्मा का कहना है कि यह कलश बेहद विशिष्ट है और संभवतः पूरे देश में इस तरह का दूसरा उदाहरण नहीं मिलता।
मंदिर निर्माण की योजना
परिवार ने बताया कि भोपाल में नीम करोली बाबा के नाम पर एक भव्य मंदिर और आश्रम स्थापित करने की योजना बनाई जा रही है। यहां इस अस्थि कलश को विधिपूर्वक स्थापित किया जाएगा, ताकि श्रद्धालु दर्शन कर सकें।
इस आध्यात्मिक धरोहर के माध्यम से नीम करोली बाबा की स्मृतियां आज भी भक्तों के बीच जीवित हैं और उनकी आस्था को और मजबूत कर रही हैं।
