• Banaras Now, Varanasi
  • July 14, 2026
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वाराणसी। जिले में एक रिटायर्ड शिक्षक को जालसाजी का शिकार बनाकर उनकी करीब 50 करोड़ रुपये मूल्य की 60 बिस्वा कीमती ज़मीन हड़पने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। आरोपियों ने इस पूरी धोखाधड़ी को पीड़ित बुजुर्ग के इलाज (डायलिसिस) की आड़ में अंजाम दिया। कोर्ट के हस्तक्षेप के बाद इस मामले में भाजपा के जिला उपाध्यक्ष, उप-निबंधक (सब-रजिस्ट्रार) और रजिस्ट्री कार्यालय के लिपिक समेत 10 लोगों के खिलाफ रोहनिया थाने में गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया गया है।

अस्पताल से सीधे रजिस्ट्री दफ्तर ले गए आरोपी

रोहनिया थाना क्षेत्र की निवासी प्रमिला मिश्रा ने इस मामले को लेकर अदालत का दरवाजा खटखटाया था। शिकायत के मुताबिक, उनके 65 वर्षीय पति ओम प्रकाश मिश्रा शिक्षा विभाग से सेवानिवृत्त हैं और उनकी सप्ताह में दो बार डायलिसिस होती है।

पीड़ित परिवार को जाल में फंसाने के लिए आरोपियों ने डायलिसिस के भारी-भरकम खर्च का हवाला दिया और कहा कि वे उनका ‘आयुष्मान कार्ड’ बनवा देंगे जिससे इलाज मुफ्त हो जाएगा। इसके बाद आरोपियों ने ओम प्रकाश मिश्रा के नाम पर एक नया मोबाइल नंबर लिया और बैंक में फर्जी खाता खुलवा दिया। इस नए नंबर को बुजुर्ग शिक्षक के पेंशन खाते से भी लिंक कर दिया गया ताकि पैसों के लेन-देन का किसी को पता न चल सके।

अचेत अवस्था का उठाया फायदा

ठगी की पटकथा 30 मार्च को तब आगे बढ़ी जब ओम प्रकाश मिश्रा का मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ, जिसके चलते वे आंखों पर गहरा काला चश्मा लगाते थे। 7 अप्रैल को आरोपी उन्हें डायलिसिस कराने के लिए महमूरगंज स्थित एक निजी अस्पताल ले गए।

आरोप लगाया गया है कि डायलिसिस के बाद ओम प्रकाश मिश्रा लगभग अर्धविक्षिप्त या अचेत अवस्था में थे। आरोपी उन्हें अस्पताल से घर ले जाने के बजाय सीधे राजातालाब स्थित उप-निबंधक कार्यालय ले गए। वहां रजिस्ट्री दफ्तर के लिपिक की मिलीभगत से राजातालाब मुख्य मार्ग पर स्थित करोड़ों की 60 बिस्वा जमीन के सौदे (सट्टा) के कागजात पर उनके अंगूठे या दस्तखत ले लिए गए।

होश आने पर हुआ चौंकाने वाला खुलासा

मामले की भनक पीड़ित परिवार को तब लगी जब ओम प्रकाश मिश्रा पूरी तरह होश में आए और उन्होंने अपने आयुष्मान कार्ड के बारे में पूछा। इसके बाद मामले में शामिल उनका सगा भतीजा विशाल मिश्रा और ड्राइवर रवि उपाध्याय टालमटोल करने लगे और अचानक गायब हो गए।

जांच में सामने आया कि अपनों ने ही मिलकर इस पूरी साजिश को रचा था। जमीन को बेचने से पहले बकायदा उसे कागजों में दान में मिली हुई दिखाया गया, ताकि आगे का रास्ता साफ हो सके। बाद में इस बेशकीमती जमीन को भाजपा जिला उपाध्यक्ष सुरेश सिंह को बेच दिया गया।

कोर्ट का कड़ा रुख: अदालत ने प्रमिला मिश्रा द्वारा पेश किए गए दस्तावेजों और साक्ष्यों को प्रथम दृष्ट्या सही पाते हुए तत्काल प्राथमिकी दर्ज करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने भाजपा नेता सुरेश सिंह को इस पूरे खेल का मुख्य साजिशकर्ता माना है।

इन प्रमुख लोगों पर दर्ज हुआ मुकदमा:

  • सुरेश सिंह (भाजपा जिला उपाध्यक्ष व मुख्य साजिशकर्ता)
  • अनिल कुमार (तत्कालीन उप निबंधक / सब-रजिस्ट्रार)
  • सत्यंशु सिंह (रजिस्ट्री कार्यालय के लिपिक)
  • विशाल मिश्रा (पीड़ित महिला का सगा भतीजा)
  • रवि उपाध्याय (परिवार का निजी ड्राइवर)
  • इनके अलावा 5 अन्य सहयोगी भी नामजद हैं।

गौरतलब है कि पीड़ित शिकायतकर्ता प्रमिला मिश्रा का इकलौता बेटा अभिषेक मिश्रा मुरादाबाद में डॉक्टर के पद पर तैनात है। पुलिस ने कोर्ट के आदेश पर मामला दर्ज कर लिया है और राजस्व व पुलिस विभाग की टीमें इस हाई-प्रोफाइल जमीन घोटाले की जांच में जुट गई हैं।

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