वाराणसी। जिले में संभावित बाढ़ के खतरे को देखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन पूरी तरह ‘अलर्ट मोड’ पर आ गया है। उत्तर प्रदेश शासन के निर्देशानुसार जिले में राहत और बचाव तंत्र को सक्रिय कर दिया गया है। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, जल पुलिस, पीएसी और आपदा मित्रों ने संयुक्त मॉक ड्रिल के जरिए अपनी तैयारियों को परख लिया है, ताकि किसी भी आपात स्थिति में ‘जीरो रिस्पांस टाइम’ के साथ राहत कार्य शुरू किया जा सके। अपर जिलाधिकारी (वित्त एवं राजस्व) डॉ. सदानंद गुप्ता ने सभी चिन्हित राहत शिविरों, बाढ़ चौकियों और मार्गों का स्थलीय निरीक्षण कर व्यवस्थाओं को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए हैं।
जिले में संभावित बाढ़ प्रभावित कुल 195 गांवों और मोहल्लों की पहचान की गई है, जिनमें सदर तहसील के 150, राजातालाब के 24 और पिंडरा के 21 क्षेत्र शामिल हैं। विस्थापितों को सुरक्षित आश्रय देने के लिए कुल 46 स्थायी बाढ़ राहत शिविर तैयार किए गए हैं, जिनकी क्षमता 7,392 लोगों की है। इसके अतिरिक्त सदर तहसील में 3,785 लोगों की क्षमता वाले 15 अस्थायी शिविर भी बनाए गए हैं। सभी शिविरों की जियोटैगिंग पूरी कर वहां नोडल अधिकारियों की तैनाती कर दी गई है। निगरानी तंत्र को मजबूत करने के लिए 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं, जिनमें 7 वायरलेस चौकियां चौबीसों घंटे सक्रिय रहेंगी।

राहत शिविरों में मानवीय और मवेशी दोनों स्तरों पर व्यापक बंदोबस्त किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की मेडिकल टीमें तैनात हैं, वहीं पशुपालन विभाग ने पशु चिकित्सकों के साथ चारे की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की है। बचाव कार्यों के लिए नाविकों को 33,300 लाइफ जैकेट बांटे जा चुके हैं। आवश्यकता पड़ने पर थल सेना और वायु सेना की मदद लेने का भी खाका तैयार है। केंद्रीय जल आयोग (CWC) के जरिए हर दो घंटे पर गंगा के जलस्तर की निगरानी की जा रही है। आमजन की सहायता के लिए 24 घंटे संचालित बाढ़ नियंत्रण कक्ष के हेल्पलाइन नंबर (0542-2508550, 0542-2504170, 1077 और 9140037137) जारी किए गए हैं।
वाराणसी के साथ-साथ पड़ोसी जनपदों चंदौली, जौनपुर और गाजीपुर में भी प्रशासनिक अमले को सतर्क रहने के आदेश दिए गए हैं, जिससे पूरे क्षेत्र में किसी भी जलभराव या बाढ़ की विभीषिका से समय रहते निपटा जा सके।
