वाराणसी। काशी में गंगा का जलस्तर अप्रत्याशित रूप से बढ़ने से तटवर्ती इलाकों और ऐतिहासिक घाटों पर गंभीर संकट खड़ा हो गया है। मंगलवार को गंगा की लहरें घाटों की ऊपरी सीढ़ियों को पार कर गईं, जिससे बनारस के सभी 84 पक्के घाटों का आपसी पैदल संपर्क पूरी तरह टूट गया है। स्नान कुंड और प्रमुख चबूतरे पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं, जिससे स्थानीय नागरिकों और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं की आवाजाही थम गई है।
केंद्रीय जल आयोग के अनुसार, प्रयागराज (115 मिमी) और फाफामऊ (96.8 मिमी) में भारी वर्षा के चलते गंगा का जलस्तर 40 मिमी प्रति घंटे की तेज गति से बढ़ रहा है। वाराणसी में वर्तमान जलस्तर 66.72 मीटर दर्ज किया गया है, जबकि यहाँ चेतावनी स्तर 70.262 मीटर और खतरे का निशान 71.262 मीटर है। ऊपरी इलाकों से लगातार पानी आने के कारण अगले 24 घंटों में जलस्तर के और ऊपर जाने की संभावना जताई गई है।
गंगा के उफान का सबसे मार्मिक असर मणिकर्णिका और हरिश्चंद्र घाट पर पड़ा है। दोनों महाश्मशानों के मूल शवदाह स्थल डूब जाने के कारण अब शवों का अंतिम संस्कार ऊपरी सीढ़ियों व चबूतरों पर किया जा रहा है। स्थान की भारी कमी और फिसलन के कारण दाह संस्कार के लिए आने वाले परिजनों को अत्यंत कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। यदि जलस्तर में और वृद्धि होती है, तो शवदाह के लिए स्थान का संकट और गहरा सकता है।
वहीं, विश्वप्रसिद्ध दशाश्वमेध घाट पर गंगा सेवा निधि द्वारा आयोजित होने वाली दैनिक महाआरती को जलभराव के चलते छत पर स्थानांतरित कर दिया गया है। अस्सी घाट पर भी गंगा का जल आरती स्थल की चौखट तक पहुंच चुका है, जबकि संत रविदास घाट, नया सामने घाट और नमो घाट के कई प्लेटफॉर्म पूरी तरह जलमग्न हो चुके हैं।

गंगा के बढ़ते दबाव के कारण सहायक वरुणा नदी में पलट प्रवाह (बैक-फ्लो) शुरू हो गया है। इससे सरैया, कोनिया और शैलपुत्री जैसे तटीय मोहल्लों में बाढ़ का पानी घुसने का खतरा मंडराने लगा है। सुरक्षा के मद्देनजर जिला प्रशासन ने निजी व पर्यटन नौकाओं के संचालन पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है। संवेदनशील घाटों पर बैरिकेडिंग कर एनडीआरएफ (NDRF) और जल पुलिस की टीमें लगातार गश्त कर रही हैं।
