वाराणसी। बीएचयू (काशी हिंदू विश्वविद्यालय) के ट्रॉमा सेंटर में पिछले दिनों एक महिला मरीज की गलत सर्जरी के कारण संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मौत के बाद हंगामा खड़ा हो गया है। मृतका की पहचान राधिका देवी के रूप में हुई। इस घटना को लेकर छात्रों ने गंभीर आरोप लगाते हुए इसे सामान्य चिकित्सकीय चूक नहीं, बल्कि संस्थागत लापरवाही का मामला बताया है। छात्रों ने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
छात्रों का कहना है कि यह घटना विश्वविद्यालय की कार्यप्रणाली पर बड़ा सवाल खड़ा करती है। उनका आरोप है कि यदि समय रहते आवश्यक चिकित्सा प्रोटोकॉल का पालन किया गया होता, तो इस तरह की घटना से बचा जा सकता था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पीड़िता को न्याय दिलाने के लिए जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है।
मामले में यह भी सामने आया है कि मरीज की पहचान सुनिश्चित करने के लिए जरूरी सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं किया गया। न तो मरीज को आर्मबैंड लगाया गया और न ही ऑपरेशन से पहले जरूरी सत्यापन प्रक्रिया पूरी की गई। आरोप है कि पहले लागू प्री-ऑपरेटिव वेरिफिकेशन सिस्टम को प्रशासनिक स्तर पर समाप्त कर दिया गया था, जबकि उसकी जगह कोई नई व्यवस्था लागू नहीं की गई।
छात्रों ने यह भी दावा किया कि इससे पहले भी इसी तरह की लापरवाही सामने आ चुकी है। आरोप है कि मरीज, जिसकी न्यूरो सर्जरी होनी थी, उसे गलती से ऑर्थोपेडिक ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया, जिसके चलते उसकी जान चली गई। छात्रों ने इसे ‘टाली जा सकने वाली मौत’ का उदाहरण बताया है।
दरअसल 7 मार्च को फ्रैक्चर वाले मरीज की सर्जरी होनी थी, लेकिन गलती से ट्यूमर से पीड़ित राधिका देवी को ऑपरेशन थिएटर में ले जाया गया। सर्जरी के दौरान जब डॉक्टरों को पैर में कोई फ्रैक्चर नहीं मिला तो उन्हें संदेह हुआ कि मरीज बदल गई है। इसके बाद जल्दबाजी में ऑपरेशन रोककर पैर को सिल दिया गया और मरीज को बाहर भेज दिया गया। बाद में 18 मार्च को उसकी न्यूरो सर्जरी की गई, लेकिन हालत बिगड़ने के बाद 27 मार्च को उसकी मौत हो गई।
छात्रों ने बताया कि 24 मार्च 2022 की अधिसूचना के अनुसार ट्रॉमा सेंटर की प्रशासनिक और निगरानी संबंधी जिम्मेदारी प्रोफेसर इंचार्ज की होती है। वर्तमान में यह जिम्मेदारी प्रो. सौरभ सिंह के पास है, ऐसे में इस मामले में उनकी जवाबदेही तय होनी चाहिए।
घटना के विरोध में छात्रों ने जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन के खिलाफ आक्रोश जताया। छात्र ज्ञापन लेकर कुलपति से मिलने भी पहुंचे, लेकिन उनका आरोप है कि अब तक उन्हें मुलाकात का समय नहीं दिया गया है और न ही कोई ठोस कार्रवाई की गई है।
छात्रों ने चेतावनी दी है कि यदि विश्वविद्यालय स्तर पर उन्हें न्याय नहीं मिला, तो वे इस मामले को केंद्रीय शिक्षा मंत्री और स्वास्थ्य मंत्री तक ले जाएंगे। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि आखिर किनके संरक्षण में दोषियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
इस दौरान डॉ. मृत्युञ्जय तिवारी, हिमांशु राय, प्रफुल पांडेय, अभय सिंह मिक्कू, हर्ष तिवारी, रजत सिंह, सुजीत पासवान, विशाल पासवान, दीपक सिंह, अविनाश सिंह चंदू, कृष्ण यादव, शिवम राय और आदित्य सिंह समेत कई छात्र मौजूद रहे।
छात्रों की प्रमुख मांगें:
- प्रो. सौरभ सिंह को तत्काल प्रभाव से पद से हटाया जाए।
- पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्चस्तरीय जांच कराई जाए।
- दोषियों के खिलाफ कड़ी दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
