काशी में सरस मेला, लखपति दीदियों ने 9 दिन में किया 56 लाख का कारोबार, आत्मनिर्भरता की नई उड़ान
वाराणसी में इन दिनों महिला स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का अनोखा उत्सव सजा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ‘सरस मेला’ में देश के 13 राज्यों से …
वाराणसी में इन दिनों महिला स्वावलंबन और ग्रामीण उद्यमिता का अनोखा उत्सव सजा है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत आयोजित राष्ट्रीय स्तरीय ‘सरस मेला’ में देश के 13 राज्यों से आई 109 लखपति दीदियों ने महज नौ दिनों में लगभग 56 लाख रुपये का व्यवसाय कर यह साबित कर दिया कि हुनर और हौसले को यदि सही मंच मिले तो सफलता तय है।
National Rural Livelihoods Mission (एनआरएलएम) से जुड़ी स्वयं सहायता समूह की महिलाएं न केवल अपने परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही हैं, बल्कि नेतृत्व और आत्मनिर्भरता की नई मिसाल भी पेश कर रही हैं। काशी में सजा यह मेला ‘लघु भारत’ की झलक दिखा रहा है, जहां अलग-अलग प्रदेशों की संस्कृति, हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध हैं।
संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय में सजा राष्ट्रीय बाजार
यह भव्य आयोजन Sampurnanand Sanskrit University परिसर में आयोजित किया गया है। यहां 109 स्टाल लगाए गए हैं, जिनमें सबसे अधिक 47 स्टाल उत्तर प्रदेश की लखपति दीदियों के हैं। ओडिशा दूसरे स्थान पर है। मेले की अवधि दो मार्च तक निर्धारित है।
उपायुक्त (स्वरोजगार) पवन कुमार सिंह के अनुसार, मेले में अब तक 46.52 लाख से अधिक का कारोबार हो चुका है, जो जल्द ही 56 लाख के आंकड़े को पार कर गया। उनका कहना है कि इस आयोजन का उद्देश्य केवल बिक्री नहीं, बल्कि स्वयं सहायता समूहों को राष्ट्रीय स्तर का बाजार उपलब्ध कराना है।
योगी सरकार का बाजार से जोड़ने का मॉडल
राज्य सरकार उत्पादन के लिए वित्तीय सहयोग के साथ-साथ विपणन की मजबूत व्यवस्था भी सुनिश्चित कर रही है। इससे समूह की महिलाएं बिचौलियों पर निर्भर हुए बिना सीधे ग्राहकों से जुड़ पा रही हैं। मेले में मातृशक्तियां अपने उत्पादों की विशेषताएं स्वयं बताकर बिक्री कर रही हैं, जिससे उनका आत्मविश्वास और पहचान दोनों बढ़ रही हैं।
13 राज्यों की भागीदारी, विविधता का संगम
इस मेले में हरियाणा, झारखंड, उत्तर प्रदेश, तेलंगाना, उड़ीसा, बिहार, गुजरात, महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, पंजाब और मध्य प्रदेश की महिलाओं ने भाग लिया है। हर स्टाल अपने प्रदेश की विशिष्ट पहचान और परंपरा को दर्शा रहा है।
प्रमुख उत्पादों की झलक
मेले में चिकनकारी, ब्लैक पॉटरी, बनारसी सिल्क साड़ी, लकड़ी के खिलौने, महिलाओं के परिधान, लाख की चूड़ियां, सॉफ्ट टॉय, डेकोरेटिव आइटम, जरी-जरदोजी, जूट बैग, बांस उत्पाद, चादरें, प्राकृतिक खाद्य पदार्थ और नारियल से बने उत्पादों की भरपूर मांग देखी जा रही है।
काशी की धरती पर इत्र की खुशबू आत्मनिर्भरता का संदेश दे रही है, तो लोहे के बर्तन और हस्तनिर्मित वस्तुएं इन महिलाओं के कौशल की गवाही दे रही हैं। खरीदारों को यहां गुणवत्ता, परंपरा और किफायती दाम—तीनों का संगम मिल रहा है।
आत्मनिर्भर भारत की सजीव तस्वीर
‘सरस मेला’ केवल व्यापार का मंच नहीं, बल्कि ग्रामीण नारी शक्ति के आत्मविश्वास का उत्सव बन गया है। यहां की हर दीदी अपनी सफलता की कहानी खुद लिख रही है। यह आयोजन दिखाता है कि जब ग्रामीण महिलाओं को प्रशिक्षण, वित्त और बाजार की सुविधा मिलती है, तो वे ‘लखपति दीदी’ बनकर समाज और अर्थव्यवस्था दोनों को सशक्त कर सकती हैं।
काशी में सजा यह मेला नए भारत की नई नारी शक्ति का जीवंत उदाहरण है—जहां परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल रही हैं, और स्वावलंबन की यह सुगंध दूर तक फैल रही है।
















