• Banaras Now, Varanasi
  • April 18, 2026

औरैया: उत्तर प्रदेश के औरैया जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जिसने लोगों को भावुक कर दिया है। लक्ष्मणपुर गांव के 65 वर्षीय राकेश यादव ने अपने जीवनकाल में ही तेरहवीं का भोज कराने का फैसला लिया है। इसके लिए उन्होंने करीब 1900 लोगों को निमंत्रण भेजा है और सोमवार को यह भंडारा आयोजित किया जा रहा है।

अकेलेपन ने लिया यह फैसला

राकेश यादव अपने परिवार में सबसे बड़े हैं। उनके दोनों छोटे भाइयों की मौत हो चुकी है—एक की बीमारी से और दूसरे की हत्या कर दी गई थी। तीनों भाइयों की शादी नहीं हुई थी, जिससे परिवार में कोई सहारा नहीं बचा। उनकी एक बहन है, लेकिन वह अपने परिवार के साथ रहती हैं। ऐसे में बुजुर्ग को अपने भविष्य को लेकर चिंता सताने लगी।

राकेश का कहना है कि बुढ़ापे में उनकी देखभाल करने वाला कोई नहीं है और उन्हें यह भी डर है कि उनके निधन के बाद उनकी तेरहवीं कौन करेगा। इसी चिंता के चलते उन्होंने खुद ही यह आयोजन करने का निर्णय लिया।

साधारण जीवन, बड़ा निर्णय

राकेश यादव ने अपना पैतृक घर एक रिश्तेदार को दान कर दिया है और अब वे एक साधारण झोपड़ी में रह रहे हैं। उन्होंने जीवनभर की बचत और वृद्धावस्था पेंशन से यह भोज कराने का फैसला लिया है।

सिर्फ भोज का आयोजन

उन्होंने साफ किया है कि यह कार्यक्रम केवल भोज तक सीमित रहेगा, किसी तरह का धार्मिक अनुष्ठान जैसे पिंडदान नहीं कराया जाएगा। गांव में इस फैसले को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। कुछ लोग इसे उनकी मजबूरी और अकेलेपन का परिणाम मान रहे हैं, तो कुछ इसे एक अनोखा कदम बता रहे हैं।

गांव वालों से ज्यादा उम्मीद

राकेश ने कई रिश्तेदारों को भी निमंत्रण भेजा है, लेकिन उन्हें सबसे ज्यादा उम्मीद गांव के लोगों से है। वे कहते हैं कि जीवनभर दूसरों के सुख-दुख में शामिल हुए हैं, इसलिए चाहते हैं कि उनके इस आयोजन में भी लोग शामिल हों।

यह घटना समाज में बढ़ते अकेलेपन और बुजुर्गों की स्थिति पर सोचने को मजबूर करती है।

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