वाराणसी: मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने वाराणसी दौरे के दौरान बड़ा बयान देते हुए कहा कि काशी विश्वनाथ धाम की तर्ज पर महाकालेश्वर मंदिर धाम का व्यापक और आधुनिक विकास किया जाएगा। उन्होंने काशी विश्वनाथ धाम में लागू व्यवस्थाओं, विशेषकर क्राउड मैनेजमेंट सिस्टम की सराहना करते हुए इसे देश के अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के लिए आदर्श मॉडल बताया।
मुख्यमंत्री मोहन यादव मंगलवार सुबह वाराणसी पहुंचे, जहां उन्होंने विधिवत बाबा विश्वनाथ के दर्शन-पूजन किए। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर का विस्तृत निरीक्षण किया और वहां लागू सुरक्षा, साफ-सफाई, श्रद्धालु सुविधाओं तथा भीड़ नियंत्रण व्यवस्था का गहन अध्ययन किया। इस दौरान उन्होंने जिलाधिकारी और मंदिर प्रशासन से व्यवस्थाओं की बारीक जानकारी ली। करीब एक घंटे तक चली प्रस्तुति में मंदिर की एसओपी (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) और डिजिटल मॉनिटरिंग सिस्टम को समझा गया।
महाकालेश्वर धाम को मिलेगा आधुनिक स्वरूप
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम में श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए जो आधुनिक व्यवस्थाएं विकसित की गई हैं, वे अनुकरणीय हैं। मध्य प्रदेश में उज्जैन स्थित महाकालेश्वर धाम को इसी स्तर पर विकसित करने की योजना है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर अनुभव मिल सके। उन्होंने यह भी कहा कि आगामी सिंहस्थ महाकुंभ के आयोजन में काशी और प्रयागराज के अनुभवों का लाभ उठाया जाएगा।
एमपी-यूपी सहयोग से उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा
इसके बाद मुख्यमंत्री ने कैंट क्षेत्र स्थित होटल में आयोजित एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन में भाग लिया। इस सम्मेलन में उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच धार्मिक, सांस्कृतिक, औद्योगिक और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री Rakesh Sachan और Nand Gopal Gupta Nandi भी मौजूद रहे।

सम्मेलन के दौरान काशी विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच एक महत्वपूर्ण एमओयू (समझौता ज्ञापन) पर हस्ताक्षर किए गए। इस समझौते के तहत दोनों ट्रस्ट ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ (ODOP) योजना के अंतर्गत संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। इसका उद्देश्य स्थानीय कारीगरों, शिल्पकारों और छोटे उद्योगों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाना है।
मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की साझा सांस्कृतिक विरासत दोनों राज्यों को एक मजबूत आधार प्रदान करती है। इस सहयोग के जरिए न केवल धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि एमएसएमई सेक्टर में निवेश और रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि मध्य प्रदेश में निवेश के लिए अनंत संभावनाएं हैं और राज्य सरकार उद्योगों के लिए अनुकूल माहौल प्रदान कर रही है।
इन्फ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा परियोजनाओं पर फोकस
उन्होंने यह भी बताया कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना पर कार्य शुरू हो चुका है, जिसका लाभ दोनों राज्यों के बुंदेलखंड क्षेत्र को मिलेगा। इससे सिंचाई और पेयजल की समस्या का समाधान होगा और कृषि क्षेत्र को मजबूती मिलेगी। इसके अलावा, मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश मिलकर मुरैना में 2000 मेगावॉट के सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं, जो ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि साबित हो सकता है।
कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने बताया कि राज्य में 96 लाख से अधिक एमएसएमई इकाइयां संचालित हैं, जो करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं। उन्होंने कहा कि 2018 में शुरू की गई ओडीओपी योजना के तहत प्रदेश के पारंपरिक उत्पादों को नई पहचान मिली है और निर्यात में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। युवाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए बिना ब्याज के ऋण योजनाएं भी चलाई जा रही हैं।

उन्होंने वाराणसी में 100 एकड़ भूमि पर प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क का भी उल्लेख किया, जो क्षेत्र के औद्योगिक विकास को नई दिशा देगा। वहीं, औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने कहा कि यह सम्मेलन दोनों राज्यों के बीच औद्योगिक और सांस्कृतिक संबंधों को और मजबूत करेगा और भविष्य में बड़े निवेश के रास्ते खोलेगा।
सम्मेलन के दौरान आयोजित प्रदर्शनी भी आकर्षण का केंद्र रही, जिसमें उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के कारीगरों द्वारा बनाए गए विभिन्न ओडीओपी और जीआई टैग उत्पादों का प्रदर्शन किया गया। इसमें बनारसी साड़ी, जरी-जरदोजी, वुडन क्राफ्ट, ग्लास माला, गुलाबी मीनाकारी सहित कई पारंपरिक उत्पादों को प्रदर्शित किया गया। मुख्यमंत्री ने प्रदर्शनी का अवलोकन कर कारीगरों के कार्य की सराहना की।
अंत में मुख्यमंत्री मोहन यादव ने कहा कि इस तरह के सहयोगात्मक प्रयास दोनों राज्यों के बीच विकास की नई इबारत लिखेंगे। धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक जुड़ाव और औद्योगिक प्रगति के संगम से उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
