वाराणसी। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ० मोहन यादव मंगलवार को अपने दौरे पर वाराणसी पहुंचे। इस दौरान उन्होंने बाबा काशी विश्वनाथ के दरबार में हाजिरी लगाई। इसके बाद वे MP-UP सहयोग सम्मेलन 2026 में शामिल हुए, जहां निवेश, ODOP, GI टैग, शिल्प और पर्यटन को लेकर कई महत्वपूर्ण फैसले लिए। मोहन यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश न केवल भौगोलिक रूप से जुड़े हैं, बल्कि दोनों राज्यों के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंध भी बेहद गहरे हैं। यही साझा विरासत दोनों राज्यों को विकास की दिशा में साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने वाराणसी में आयोजित एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए कहा कि यह सम्मेलन भविष्य की संभावनाओं को मजबूत आधार प्रदान करेगा और निवेश, उद्योग, पर्यटन तथा पारंपरिक उत्पादों के क्षेत्र में नए अवसर खोलेगा।

काशी और उज्जैन: आस्था और विकास के केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि काशी विश्वनाथ धाम विश्व के प्रमुख पवित्र स्थलों में शामिल है और यह नरेंद्र मोदी का कर्मक्षेत्र भी है। उनके नेतृत्व में देश निरंतर प्रगति कर रहा है और भारत विश्व की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
उन्होंने योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तरप्रदेश में स्थापित सुशासन और कानून-व्यवस्था की भी सराहना की। डॉ. यादव ने कहा कि वाराणसी की तरह उज्जैन भी धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है और दोनों ही शहरों में धार्मिक पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं, जिनके विकास के लिए बड़े स्तर पर कार्य किए जा रहे हैं।
दीप प्रज्ज्वलन के साथ सम्मेलन का शुभारंभ
MP के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने वाराणसी के होटल रामादा में दीप प्रज्ज्वलित कर सम्मेलन का शुभारंभ किया। इस सम्मेलन का उद्देश्य दोनों राज्यों की औद्योगिक क्षमताओं, पारंपरिक शिल्प, ओडीओपी (One District One Product), जीआई टैग उत्पादों, कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण, निवेश अवसरों और पर्यटन संभावनाओं को एक साझा मंच प्रदान करना है।

इस अवसर पर विश्वनाथ मंदिर ट्रस्ट और महाकालेश्वर मंदिर ट्रस्ट के बीच समझौता ज्ञापन (एमओयू) हुआ। साथ ही ओडीओपी उत्पादों के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बीच भी महत्वपूर्ण समझौते किए गए।
नक्सल मुक्त मध्यप्रदेश: विकास की नई राह
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के संकल्प के चलते देश ने नक्सलवाद के खिलाफ बड़ी सफलता हासिल की है और मध्यप्रदेश अब नक्सल मुक्त हो चुका है। इससे प्रदेश में औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी और निवेश के नए अवसर खुलेंगे。
उन्होंने बताया कि मध्यप्रदेश अपनी पारदर्शी नीतियों, विशाल भूमि बैंक, विश्वसनीय बिजली आपूर्ति और मजबूत कनेक्टिविटी के कारण निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन रहा है।
केन-बेतवा परियोजना और ऊर्जा सहयोग
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि केन-बेतवा नदी जोड़ो परियोजना दोनों राज्यों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इससे मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को सिंचाई और पेयजल की बड़ी सुविधा मिलेगी।
इसके अलावा दोनों राज्य मिलकर मुरैना में 2000 मेगावॉट क्षमता के सोलर एनर्जी प्रोजेक्ट पर भी काम कर रहे हैं, जो ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग का बड़ा उदाहरण है।

औद्योगिक विकास और निवेश की अपार संभावनाएं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश सरकार उद्योग और निवेश को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। वर्ष 2025 को उद्योग एवं रोजगार वर्ष के रूप में मनाने के बाद वर्ष 2026 में कृषि पर विशेष फोकस किया जा रहा है।
प्रदेश में सिंचाई का रकबा बढ़कर 55 लाख हेक्टेयर हो चुका है और निर्यात 70 हजार करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है। राज्य में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 40 तक पहुंच चुकी है और अस्पतालों के लिए 1 रुपये लीज पर 30 एकड़ जमीन उपलब्ध कराई जा रही है।
ओडीओपी और एमएसएमई से रोजगार को बढ़ावा
उत्तरप्रदेश के एमएसएमई मंत्री राकेश सचान ने कहा कि राज्य में 96 लाख एमएसएमई इकाइयां कार्यरत हैं, जो करीब 3 करोड़ लोगों को रोजगार दे रही हैं। 2018 में शुरू की गई ओडीओपी योजना से निर्यात में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और उत्पादों को वैश्विक पहचान मिल रही है।
औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता (नंदी) ने कहा कि यह सम्मेलन दोनों राज्यों के बीच सहयोग को और मजबूत करेगा और युवाओं को उद्यमिता की दिशा में प्रेरित करेगा।
उज्जैन में बनेगा 284 करोड़ का यूनिटी मॉल
सम्मेलन में जानकारी दी गई कि उज्जैन में 284 करोड़ रुपये की लागत से यूनिटी मॉल बनाया जाएगा, जो ओडीओपी उत्पादों का बड़ा केंद्र होगा। यहां विभिन्न राज्यों के उत्पाद एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे, जिससे व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
ओडीओपी और जीआई टैग को मिल रही पहचान
प्रमुख सचिव औद्योगिक नीति एवं निवेश प्रोत्साहन राघवेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि मध्यप्रदेश के सभी 55 जिलों में ओडीओपी उत्पाद हैं, जिनसे लाखों कारीगर और किसान जुड़े हैं। राज्य में 26 उत्पादों को जीआई टैग प्राप्त हो चुका है और ओडीओपी के माध्यम से 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार हो चुका है।
साझा विरासत से मिलेगा विकास को नया आयाम
सम्मेलन में विशेषज्ञों ने ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म जैसे अमेजन और फ्लिपकार्ट के माध्यम से ओडीओपी उत्पादों को वैश्विक बाजार तक पहुंचाने पर जोर दिया।
मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने कहा कि मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश की साझा विरासत दोनों राज्यों को विकास के नए आयाम प्रदान कर रही है और यह सहयोग भविष्य में और अधिक मजबूत होगा।
